पहाड़ पर आई जलप्रलय तो प्राकृतिक आपदा है। लेकिन इसमें जितने लोग हताहत हुए हैं उनकी संख्या को कम किया जा सकता था यदि मौसम विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और बदरी केदारनाथ मंदिर समिति सतर्कता बरतते।
इन विभागों की लापरवाही से हजारों यात्रियों की जान पर बन आई। इस साल 13 मई से यात्री चारधाम यात्रा पर जाने लगे थे। कुछ दिन बाद ही इनकी संख्या प्रतिदिन 20,000 से अधिक हो गई। यात्रा संचालन में लगे विभागों को मालूम है कि चारधाम यात्रा बहुत कुछ मौसम पर निर्भर करती है।
14 जून तक चेतावनी नहीं लगाई गई थी
पहाड़ पर मौसम कब मिजाज बदल दे कुछ पता नहीं चलता। इसके बावजूद यात्रियों को मौसम के प्रति सावधान करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। हालांकि यात्रा संचालन से जुड़े चारधाम यात्रा टर्मिनल ऋषिकेश का कहना है कि वह ऋषिकेश में भद्रकाली चौकी के पास एक बोर्ड पर मौसम की चेतावनी लगाता है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि यात्रा आरंभ होने से 14 जून तक यहां ऐसी कोई चेतावनी नहीं लगाई गई थी।
देहरादून स्थित मौसम विभाग के निदेशक आनंद शर्मा का कहना है कि उनका विभाग प्रत्येक दिन मौसम का अलर्ट (फोरकास्ट) जारी करता है। उसके बाद की जिम्मेदारी आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य विभागों की होती है कि वह उस पर किस तरह से अमल करते हैं।
मौसम विभाग की बात मान ली जाए तो भी इस हकीकत से इनकार नहीं किया जा सकता था कि खुद मौसम विभाग को नहीं मालूम था कि इस साल मानसून करीब 15 दिन पहले आ जाएगा। उसे यह भी नहीं मालूम था कि प्रदेश में इतनी बारिश होगी कि जलप्रलय आ जाएगी। कम से कम 14 जून तक मीडिया को जारी मौसम विभाग के अलर्ट से तो यही लगता है।
मसलन, 11 जून को मौसम विभाग का अलर्ट था कि अगले 24 घंटे में प्रदेश में कई स्थानों पर मध्यम गरज के साथ बारिश हो सकती है। दून में बादल छाए रहेंगे। बीच-बीच में बारिश के एक-दो दौर आ सकते हैं। इसी तरह 13 जून का अलर्ट था कि आगामी 24 घंटे में प्रदेश समेत दून के कई स्थानों पर गरज के साथ बारिश की संभावना है।
14 जून का अलर्ट था कि अगले 24 घंटे में दून समेत पूरे प्रदेश में बादल छाए रह सकते हैं। किसी-किसी स्थान पर हल्की बारिश हो सकती है तो कहीं तेज बौछारें पड़ने की संभावना है। 15 जून को मौसम विभाग ने अगले 48 से 72 घंटे के लिए भारी बारिश, भू-स्खलन की चेतावनी जारी की। चेताया था कि उत्तरकाशी जैसे क्षेत्र के शैलो जोन बादल फटने जैसी घटनाओं का आमंत्रण हो सकते हैं।
मौसम विभाग अनजान था
जाहिर है कि मौसम विभाग 14 जून तक मौसम के मिजाज से अनजान था। 15 जून को जब उसने भारी बारिश की चेतावनी जारी की तब तक काफी देर चुकी थी। लाखों की संख्या में लोग पहाड़ पर पहुंच गए थे। चारधाम और हेमकुंड साहिब से प्राप्प्त आंकड़ों केआधार पर चारधाम यात्रा टर्मिनल का आंकड़ा बताता है कि 14 जून को गंगोत्री में 7,544, यमुनोत्री में 8,833, केदारनाथ में 13,252, बदरीनाथ में 11,212 और हेमकुंड साहिब में 3,750 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे।
कुल मिलाकर 44,591 तीर्थयात्रियों ने चारधाम और हेमकुंड साहिब में दर्शन किए थे। जाहिर है कि 15 जून तक इनमें से कम ही यात्री नीचे आए होंगे। इसके विपरीत करीब 15 हजार यात्री ऋषिकेश और करीब 20 हजार यात्री सीधे हरिद्वार से चारधाम और हेमकुंड साहिब के लिए ऊपर चले गए। यदि समय पर चेतावनी जारी कर दी जाती और आपदा प्रबंधन विभाग उस पर अमल कर लेता तो इतनी बड़ी संख्या में तीर्थयात्री पहाड़ पर नहीं पहुंचते। यदि वहां इतने यात्री नहीं होते तो इस आपदा में इतने लोगों की जान न जाती।