ऊधमसिंह नगर जिले में मनरेगा संचालन में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। जिलास्तर से कमजोर निगरानी का परिणाम रहा कि पांच ब्लाॅकों में बीडीओ ने जमकर 60: 40 अनुपात की धज्जियां उड़ाई। बाजपुर, खटीमा, सितारगंज, गदरपुर और जसपुर ब्लॉक में मनरेगा के श्रम मद से श्रमिकों को रोजगार देने के बजाय सामग्री मद पर जोर दिया गया। नतीजतन बाजपुर, खटीमा में 72-72 तो सितारगंज में 60 फीसदी तक धनराशि सिर्फ सामग्री मद पर लुटाई गई।
केंद्र सरकार का उद्देश्य है कि गांवों से शहरों की ओर हो रहे पलायन को रोककर गरीब तबके को गांव में ही 100 दिन का रोजगार दिया जाए। केंद्र सरकार का साफ निर्देश है कि किसी भी दशा में सामग्री मद का भुगतान 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इधर, एक माह से जिलास्तर से निगरानी तंत्र के कमजोर पड़ने का नतीजा यह रहा कि तीन ब्लॉकों में खुले तौर पर जाॅब कार्ड धारकोंको रोजगार देने के बजाय मनरेगा अनुपात का उल्लंघन कर 72-72 फीसदी तक भुगतान केवल सामग्री मद में ही कर दिया गया।
श्रम मद से आठ माह में मात्र 10 करोड़ का ही मिला काम
प्रभारी डीडीओ के अजीब तर्ज
मनरेगा के श्रम मद में 38.62 और सामग्री मद में 61.38 फीसदी का भुगतान होता है। मनरेगा के अनुपात के उल्लंघन के बाबत पूछने पर प्रभारी डीडीओ हिमांशु जोशी ने का तर्क है कि यह कोई बड़ा अनुपात टूटने का मामला नहीं है। अंत तक इसे पूरा कर लिया जाएगा जबकि सच्चाई यह है कि औद्योगिक नगरी में श्रमिकों का हाल किसी से छिपा नहीं है। इधर, धान की कटाई के साथ ही गेहूं की बुवाई शुरू हो जाएगी। ऐसे में प्रभारी डीडीओ कैसे श्रम मद का काम बढ़ाएंगे, यह वे ही जानें।
ब्लाॅकवार श्रम-सामग्री मद का भुगतान और प्रतिशत
ब्लाॅक - श्रम भुगतान - प्रतिशत - सामग्री भुगतान - प्रतिशत - कुल भुगतान (लाख में)
बाजपुर - 238.4 27.16 639.22 72.84 877.62
गदरपुर - 132.21 52.64 118.95 47.36 251.16
जसपुर - 133.73 53.11 118.05 46.89 251.78
काशीपुर - 118.34 66.06 60.81 33.94 179.15
खटीमा - 192.3 27.98 494.98 72.02 687.28
रुद्रपुर - 107.92 73.15 39.62 26.85 147.54
सितारगंज - 150.12 39.09 233.91 60.91 384.03
यह भी जानें
मनरेगा में श्रम और सामग्री मद के अनुपात की समीक्षा की जा रही है। जिले के सभी बीडीओ को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी दशा में 60:40 का अनुपात नहीं टूटना चाहिए। ब्लॉकों में पक्के कामों की फीडिंग बंद कर कच्चे कार्यों की स्वीकृति कर कार्य कराएं। इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।