जिले में सूख चुके 32 जल स्रोतों, 10 नदियों का पुनर्जीवीकरण और कल्याणी नदी की सफाई के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की विभिन्न रेखीय विभागों ने कार्ययोजना तैयार की है। जल संवर्धन के लिए तीन माह का एक्शन प्लान बनकर तैयार हो गया है। जल्द ही स्रोत संवर्धन कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत 32 जल स्रोतों का शिलान्यास करेंगे।
शुक्रवार को विकास भवन सभागार में स्रोत संवर्धन कार्यक्रम की कार्यशाला में अल्मोड़ा से आए जीआईएस तकनीकी प्रोफेसर जेएस रावत ने कहा कि यदि जल्द ही स्रोतों और नदियों को पुनर्जीवित नहीं किया तो आने वाले 20 वर्षों में जिले में सूखा पड़ जाएगा। जैविक और मेकेनिकल दोनों तरफ से संवर्धन का कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत नदियों की सफाई, जल स्रोतों को जीवित करने का कार्य किया जाएगा। इसमें जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि, वैज्ञानिकों, स्कूल के बच्चों व आम जनता को आगे आना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में कोसी नदी बिल्कुल सिकुड़ने लगी थी, इसके बाद जिला प्रशासन के सहयोग से नदी के आसपास पौधे लगाकर और वर्षा जल से कोसी नदी को जीवित किया गया। बताया कि अल्मोड़ा, बागेश्वर और नैनीताल में जल संवर्धन का कार्यक्रम शुरू हो गया है। डीएम डॉ. रंजना राजगुरु ने बताया कि पहले प्राकृतिक स्रोत से लोग पानी पी लेते थे लेकिन अब धीरे-धीरे स्रोत सूखने लगे हैं।
उन्होंने रेखीय विभागों को निर्देश देकर इस पर गंभीरता से कार्य करने को कहा। कार्यक्रम के बाद प्रो. जेएस रावत समेत अन्य अधिकारी पत्थरचट्टा स्थित कल्याणी का उद्गम स्थल देखने पहुंचे। वहां सीडीओ हिमांशु खुराना, नगर आयुक्त रिंकू बिष्ट, परियोजना निदेशक हिमांशु जोशी, डीडीओ डॉ. महेश कुमार, सीनियर इंजीनियर सिंचाई प्रमोद दीक्षित, सीवीओ डॉ. जीएस धामी, मत्स्य सहायक निदेशक एसके छिम्वाल, जिला सेवायोजन अधिकारी आरके पंत आदि थे।
सातों ब्लॉकों में तैनात किए गए नोडल अधिकारी
रुद्रपुर। स्रोत संवर्धन कार्यक्रम की मॉनीटिरिंग के लिए सातों विकासखंडों में नोडल अधिकारी नामित कर दिए गए हैं। बाजपुर में जिला युवा कल्याण अधिकारी, खटीमा में प्रधान प्रबंधक दुग्ध संघ, रुद्रपुर में जिला कार्यक्रम अधिकारी, गदरपुर में जिला सेवायोजन अधिकारी, जसपुर में सहायक निदेशक रेशम, काशीपुर में जिला पूर्ति अधिकारी व सितारगंज में सहायक निदेशक मत्सय को देखरेख का जिम्मा सौंपा गया है। (संवाद)