फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarakhand: जिन्हें लावारिस छोड़ दिया, वे अब लोगों के ‘वारिसों’ के लिए बन रहे हैं जानलेवा

Mon, 30 Oct 2023 09:58 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर

सार

खटीमा, झनकट और चकरपुर से गुजर रहे हाईवे और मेलाघाट मार्ग पर लंबे समय से लावारिस जानवर खुलेआम घूम रहे हैं। इनसे टकराकर अक्सर सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई जानवर शहरी क्षेत्र में भी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं। 
विज्ञापन
आवार जानवर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

खटीमा में खुलेआम घूम रहे लावारिस जानवर सड़क दुर्घटनाओं का सबब बन रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासन और नगर पालिका आदि का इस समस्या की तरफ विशेष ध्यान नहीं है। खटीमा के दीया गांव में लावारिस जानवरों के लिए गोशाला का निर्माण चल रहा है लेकिन अभी इसका कार्य पूरा होने में एक माह से अधिक समय लग सकता है।  

विज्ञापन


खटीमा, झनकट और चकरपुर से गुजर रहे हाईवे और मेलाघाट मार्ग पर लंबे समय से लावारिस जानवर खुलेआम घूम रहे हैं। इनसे टकराकर अक्सर सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई जानवर शहरी क्षेत्र में भी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं। 27 अगस्त को भी खटीमा-चकरपुर के बीच हनुमान मंदिर के समीप स्कूटी से घर लौटते तिगरी निवासी दीपक खनका लावारिस जानवर से टकराकर घायल हो गए थे। चकरपुर चौकी पुलिस ने घायल को खटीमा उप जिला अस्पताल में पहुंचाकर जान बचाई थी। 

शांतिपुरी और पंतनगर में हो चुके हैं छह हादसे
क्षेत्र में लावारिस जानवरों से किसान और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम जवाहरनगर और शांतिपुरी मुख्य मार्ग में पशु सड़क पर खड़े रहते हैं। इसके चलते अक्सर पशुओं से वाहनों के टकराने की घटनाएं हो रही हैं। पंतनगर और शांतिपुरी क्षेत्र में छह से अधिक हादसों का कारण लावारिस जानवर बन चुके हैं। किसानों का कहना है कि ये जानवर उगाई गई चरी के साथ ही सब्जियों को नष्ट कर रहे हैं। 
विज्ञापन


काशीपुर में लावारिस पशुओं को रखने की व्यवस्था नहीं
क्षेत्र में लावारिस जानवरों को रखने के लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है। लगभग दो माह पूर्व गोशाला निर्माण का प्रस्ताव मुख्यमंंत्री के सम्मुख रखा गया था। इसके बाद बाजपुर रोड स्थित आलू फार्म की तीन एकड़ भूमि गोशाला के लिए नगर निगम प्रशासन को दी गई है।

मेयर ऊषा चौधरी ने बताया कि लगभग दो करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा रहा है। स्वीकृति मिलने के बाद उस पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। उन्होंने बताया काशीपुर की गोशाला जिले की सबसे बड़ी गोशाला होगी। बताया काफी समय पहले मुरादाबाद रोड स्थित पुराने ढेला पुल के पास गोशाला निर्माण के लिए भूमि चिह्नित की गई थी लेकिन वहां गोशाला बनाने की योजना किन्हीं कारणों से निरस्त कर दी थी। इसके बाद अब आलू फार्म में गोशाला बनाने की योजना है। 

 

Trending Videos
विज्ञापन

रुद्रपुर : गोशाला के लिए भूमि मिली, डीपीआर हो रही तैयार
रुद्रपुर के लंबाखेड़ा में गोशाला के लिए नगर निगम को ढाई एकड़ भूमि मिल गई है। अब निगम की ओर से गोशाला बनाने के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। अभी तक निगम की ओर से 100 निराश्रित गोवंशीय पशुओं को गोशाला छोड़ने के लिए पांच लाख रुपये खर्च किए गए हैं। प्रत्येक पशु के लिए गोशाला में 5000 रुपये चारे के लिए दिए जाते हैं।

रुद्रपुर में गोशाला नहीं होने से टांडा जंगल के साथ नेशनल हाईवे पर आवारा जानवर अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। पशुपालन विभाग के एक अनुमान के मुताबिक जिले में 5000 से अधिक लावारिस जानवर हैं। नगर निगम प्रशासन रुद्रपुर की ओर से क्षेत्र से 100 लावारिस जानवर पकड़कर बाजपुर, सितारगंज और किच्छा गोशाला भेजे गए हैं। 

बाजपुर में बाहरी क्षेत्र के गोवंशीय पशुओं को लेने पर लगाई गई रोक
बेरिया दौलत रोड स्थित गोशाला में क्षमता से अधिक 1500 गाय और गोवंशीय पशुओं की देखभाल हो रही है। गोशाला संचालकों ने बाहरी क्षेत्र से गाय सहित गोवंशीय पशुओं को लेने पर रोक लगा दी है। हालांकि अन्य जनपदों के डीएम सहित अन्य उच्च अधिकारियों के अनुरोध को स्वीकार कर लिया जाता है। गोशाला में नए टिनशेड का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।

श्री राधे कृष्ण गो सेवा सदन ट्रस्ट के सचिव जगदीश गोयल और सेवक सत्यभूषण सिंघला ने बताया कि गोशाला में वर्तमान में 1500 गाय समेत गोवंशीय पशु मौजूद हैं। इस कारण स्थानीय को छोड़कर बाहरी क्षेत्रों से आने वाली गाय और गोवंशीय पशुओं को लेने पर रोक लगा दी गई है। पिछले सप्ताह रामनगर से गाय गोशाला भेजी गई थीं। गोशाला परिसर में 105 गुणा 60 फुट का नया टिनशेड का निर्माण अंतिम चरण में चल रहा है। अनुमति नहीं मिलने के कारण मिट्टी भरान रुका हुआ है। इसके अलावा भूसा रखने के लिए दो गोदामों का भी निर्माण हो रहा है। 

नगर निगम की ओर से एनिमल कैचर वाहन और 10 सदस्यीय टीम लावारिस गोवंशीय पशुओं को पकड़ती है। वहीं, सड़क पर पाए जाने वाले पालतू पशु मिलने पर स्वामी पर 5000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जाता है।  - नरेश दुर्गापाल, एमएनए 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें