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अनियोजित विकास से स्लम बनता जा रहा रुद्रपुर शहर

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रुद्रपुर में अनियोजित रूप से बनाई गई एक कालोनी। - फोटो : RUDRAPUR
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वर्ष 2003 में सिडकुल की स्थापना के बाद रुद्रपुर का तेजी से विकास तो हुआ है, लेकिन इसके साथ ही शहर का अनियोजित फैलाव भी हुआ है। सिडकुल की फैक्ट्रियों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों के निवास की समस्या को देखते हुए रुद्रपुर में ट्रांजिट कैंप जैसी विशाल मलिन बस्ती भी अस्तित्व में आई। इसके साथ ही शहर की पुरानी संकरी और तंग गलियां भी अनियोजित विकास की दुर्दशा बयां कर रही हैं।
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रुद्रपुर शहर वर्ष 1965 में नगर पंचायत के रूप में विकसित हुआ था। इसके बाद शहर को तेजी से विस्तार होता रहा और वर्तमान में रुद्रपुर शहर नगर निगम का रूप ले चुका है। परिसीमन के बाद रुद्रपुर के 11 गांव भूरारानी, भगतपुरा देहात, रंपुरा देहात, फाजलपुर महरौला, बिगवाड़ा, शिमला बहादुर आदि शहर में शामिल हो चुके हैं। परिसीमन के बाद नगर निगम के वार्डों की संख्या 20 से बढ़कर 40 हो गई है। रुद्रपुर शहरी क्षेत्र की आबादी भी बढ़कर एक लाख, 75 पहुंच चुकी है। जिससे शहर में आबादी का दबाव बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि रुद्रपुर शहर के रंपुरा, भदईपुरा, भूत बंगला, ट्रांजिट कैंप, खेड़ा में अनियोजित विकास बढ़ता ही जा रहा है। यहां की संकरी गलियों से लोगों को काफी असुविधाएं हो रही हैं।
शहरी क्षेत्रों में शामिल हुए नए वार्डों में अभी भी सड़क, शुद्ध पेयजल, नालियों आदि की समस्याएं हैं। ट्रांजिट कैंप के कुछ वार्डों में अभी भी खस्ताहाल सड़क व जलभराव की समस्या बनी हुई है। टांडा क्षेत्र स्थित वार्ड 40 में अभी सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। बारिश में यहां की कीचड़ की समस्या रहती है। रुद्रपुर नगर निगम अभी तक फुटपाथ निर्माण कार्य पूरा नहीं कर सका है। बाजार क्षेत्र के फुटपाथों पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। लेकिन नगर निगम के अधिकारी खामोश हैं। रुद्रपुर बाजार में शौचालय न होने से व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सफाई की व्यवस्था दुरस्त न होने के कारण सार्वजनिक स्थलों पर कूड़े के ढेर लगे नजर आ रहे हैं।

रुद्रपुर शहर का नक्शा।- फोटो : RUDRAPUR

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