खटीमा। मनरेगा के कार्यों की जांच करने देहरादून से आई टीम ग्राम प्रधान संघ की मांग पर लौट गई। अब सोशल ऑडिट का काम स्थगित हो गया है। ग्राम प्रधान संघ के सदस्य मनरेगा के कार्यों का अभी तक भुगतान न होने से चिंतित हैं।
बीते दिन प्रधान संघ ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मनरेगा के कार्यों की जांच मुश्किल बताते हुए सोशल ऑडिट का विरोध किया था और ऑडिट दो-तीन माह के बाद कराने की मांग की थी। उन्होंने विकासखंड परिसर में मांग को लेकर सांकेतिक धरना देते हुए प्रदर्शन किया था। शनिवार को ही साल 2019-20, 2020-21 एवं 2021-22 में किए गए मनरेगा के कार्यों का सोशल आर्डिट करने टीम पहुंची थी।
ग्राम प्रधानों एवं बीडीसी सदस्यों ने विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि बरसात की वजह से मनरेगा के कार्यों की जांच होना संभव नहीं है। जनप्रतिनिधि मनरेगा के कार्यों का भुगतान न होने से भी चिंतित हैं। ग्राम प्रधान संघ की मांग पर सोशल आडिट के लिए यहां पहुंची 19 सदस्यीय टीम ने ऑडिट को स्थगित कर दिया और देहरादून लौट गई।
-ग्राम प्रधान संघ का मांग पत्र शासन को भेजा गया था। इस पर शासन ने मनरेगा कार्यों का सोशल आडिट कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया है। विकास खंड के लिए लंबित मनरेगा के लगभग सात करोड़ के अवशेष भुगतान में से 74 लाख रुपये मिल चुके है। शेष राशि के भी जल्द मिलने की उम्मीद है।
-असित आनंद, खंड विकास अधिकारी, खटीमा।
मनरेगा के विकास कार्यों का सोशल आडिट करने पहुंची टीम लौट गई है। मनरेगा के लंबित भुगतान एवं सोशल आडिट दोनों ही अलग-अलग हैं। सोशल आडिट के बाद भी मनरेगा का भुगतान किया जाएगा। जिले में मनरेगा का कुछ भुगतान मिल चुका है। अभी लगभग 70 करोड़ का और भुगतान होना है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा है।
-तारा हयांकी, जिला विकास अधिकारी, ऊधमसिंह नगर।
सोशल ऑडिट के विरोध में ग्राम प्रधानों का प्रदर्शन
रुद्रपुर। ग्राम पंचायतों में होने वाले सोशल ऑडिट के विरोध में ग्राम प्रधानों ने रविवार को रुद्रपुर विकास खंड कार्यालय में प्रदर्शन किया। प्रधानों ने सोशल ऑडिट एनजीओ से न कराकर कैग या सरकारी कर्मचारियों से कराने की मांग की है।
बाद में प्रधान संघ से जुड़े ग्राम प्रधानों ने विभिन्न मांगों को लेकर खंड विकास अधिकारी के नाम ज्ञापन भी सौंपा। कहा कि ग्राम पंचायतें चाहती हैं कि सोशल ऑडिट चालू वित्तीय वर्ष का हो। बरसात में ऑडिट होने पर कच्चे कार्य दिखाना मुश्किल होता है। इसलिए बरसात के बाद ऑडिट होना चाहिए। बरसात में ऑडिट हुआ तो सहयोग नहीं किया जाएगा। कहा कि अन्य राज्यों में सोशल ऑडिट कैग या फिर सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से किया जाता है। समूह या फिर एनजीओ से होने वाला सोशल ऑडिट मंजूर नहीं है। वहां प्रधान संघ अध्यक्ष दीपा कांडपाल, रिंकी कौर, पूर्जा वर्मा, राहुल तिवारी, गौसिया रहमान, सुषमा यादव आदि ग्राम प्रधान मौजूद रहे। संवाद