रुद्रपुर। धनतेरस पर बाजार में ग्राहकों ने बर्तन, सोना-चांदी से लेकर, कार-बाइक, फर्नीचर, कपड़ों की भी खूब खरीदारी की। रात 10 बजे तक रुद्रपुर बाजार में ग्राहकों की चहल-पहल दिखाई दी। एक अनुमान के मुताबिक रुद्रपुर में 50 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हुआ। सबसे ज्यादा वाहन बाजार में धन बरसा है। पिछले वर्ष के मुताबिक आभूषण, कपड़ा, फर्नीचर, ऑटोमोबाइल सेक्टर में दोगुना कारोबार देखने को मिला है। इससे व्यापारी और कारोबारियों के चेहरे खिल उठे। व्यापारियों की मानें तो हाल ही में आई आपदा से धनतेरस और दीपावली के पर्व पर उबरने का मौका मिल गया है।
बर्तन की दुकान में जमकर रही भीड़ भाड़
रुद्रपुर। बर्तनों की दुकानों पर ग्राहकों की खूब भीड़भाड़ देखने को मिली, जिससे व्यापारियों की खूब चांदी हुई है। कई ग्राहक बतौर शगुन प्लेट और ग्लास खरीद ले गए। रुद्रपुर में बर्तनों की 3.5 करोड़ रुपये की सेल हुई है।
ग्राहकों ने सोना-चांदी से लेकर खूब खरीदे डायमंड
रुद्रपुर। पिछले वर्ष को देखते हुए धनतेरस पर्व पर सोना-चांदी और डायमंड की कुल पांच करोड़ रुपये की बिक्री देखने को मिली है। ज्वैलर्स की दुकान में आभूषण खरीदने को लेकर भारी भीड़ रही। रुद्रपुर ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष निशांत ढल्ला ने बताया कि पिछले वर्ष के मुताबिक इस बार दो गुना कारोबार देखने को मिला है।
वॉशिंग मशीन से लेकर फ्रिज, टीवी की खूब हुई खरीदारी
रुद्रपुर। धनतेरस पर्व पर इलेक्ट्रोनिक्स कारोबार भी बूम पर रहा। बड़ी दुकानों और शोरूमों में वाशिंग मशीन, फ्रिज, टीवी, ओवन, एलईडी की खूब बिक्री हुई। इलेक्ट्रोनिक कारोबारी आरके ढींगरा ने बताया कि धनतेरस पर और दिनों के मुताबिक खूब बिक्री हुई है। फ्रिज, टीवी, वाशिंग मशीन के दाम बढ़ने के बावजूद लोगों को नए-नए फीचर्स के उत्पाद काफी पसंद आ रहे हैं। शहर में इलेक्ट्रोनिक्स का आठ करोड़ रुपये का कारोबार देखने को मिला है।
450 बाइकें, 425 कारों की हुई डिलीवरी
रुद्रपुर। गोपाल बजाज कंपनी के मालिक रामगोपाल बजाज ने बताया कि धनतेरस पर्व पर बजाज की 450 बाइकों की बिक्री हुई है। वहीं कुमार ऑटो व्हील्स के महाप्रबंधक विपिन पांडेय ने बताया कि महिंद्रा की 50 कारें, आकांक्षा ऑटोमोबाइल के प्रबंध निदेशक पुनीत ने बताया कि 250 अल्टो व डिजायर और नेक्सा की 75 कारों की बिक्री हुई है। इसके साथ ही हुंडई के मालिक आनंद अग्रवाल ने बताया कि शोरूम से 50 गाड़ियों की डिलीवरी हुई है। ऑटोमोबाइल कारोबारियों की मानें तो इस वर्ष उन्हें 26.5 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है। पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण में न के बराबर कारोबार हुआ था, जबकि इस बार कारोबार बूम पर है। सेमीकंडक्टर चिप के चलते सैकड़ों कारों की डिलीवरी वेटिंग में चल रही हैं।
स्थान- ऑटोमोबाइल आभूषण बर्तन इलेक्ट्रोनिक्स फर्नीचर कपड़े
रुद्रपुर : 26.5 करोड़ 05 करोड़ 3.5 करोड़ 08 करोड़ 4.5 करोड़ 2.5 करोड़
काशीपुर : 5 करोड़ 10 करोड़ दो करोड़ 1 करोड़ 1 करोड़ 1 करोड़
काशीपुर में दस करोड़ का सराफा, पांच करोड़ का हुआ आटो कारोबार
काशीपुर। धनतेरस पर सराफा बाजार में पिछले वर्ष की तुलना काफी तेजी देखी गई। पिछले दो वर्षों की तुलना में बाजार मजबूत स्थिति में रहा। सिर्फ काशीपुर में सराफा ने दस करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। आटो में करीब पांच करोड़ और बर्तन बाजार में दो करोड़ रूपये का व्यवसाय होने का अनुमान है।
धनतेरस पर विभिन्न दोपहिया कंपनियों के 628 वाहनों की बिक्री हुई। देर रात तक वाहन बाजार में रौनक दिखाी।
मेहरोत्रा इंटरप्राइजेज के पार्टनर अर्पित मेहरोत्रा ने बताया कि उनके शोरुम से हीरो कंपनी की 350 से अधिक बाइकें बिकी है। इंदर होंडा के स्वामी जितेंद्र हुड्डा ने बताया कि उनके यहां 122 दोपहिया वाहन बिके। तिरुपति एजेंसी के स्वामी राम मेहरोत्रा ने बताया कि 122 वाहनों की बिक्री हुई। इलेक्ट्रोजैमो पाई कंपनी के डीलर विकास अरोरा के मुताबिक कुल 22 और याम्हा कंपनी के डीलर संजय अग्रवाल ने कुल 12 वाहनों की बिक्री होने की जानकारी दी। देर शाम तक कुल कारोबार पांच करोड़ से अधिक का होने की उम्मीद जताई गई।
उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पूर्व अध्यक्ष दीपक वर्मा ने बताया कि धनतेरस पर पिछले दो सालों की तुलना में बाजार में खासा उछाल देखा गया। धान की फसल समय से उठ जाने की वजह से कारोबार में अपेक्षाकृत तेजी देखी गई। इस बार सोने के सिक्कों, चांदी के सिक्कों और डॉलर, पुराने सिक्कों, गिन्नी आदि की मांग काफी अधिक रही।
पूर्व अध्यक्ष राजीव सेतिया ने बताया कि सराफा कारोबार में पिछले वर्ष की तुलना में 30 से 40 फीसद तेजी की उम्मीद है। चांदी के सिक्को व बर्तनों की बिक्री परंपरागत है। बर्तन व्यापार से जुड़े कारोबारी हालांकि दो करोड़ से अधिक का बाजार मान रहे है। धनतेरस पर लगभग तीन करोड़ रुपये मूल्य की 30 से ज्यादा कारे भी बिकी। राजीव परनामी ने बताया कि काशीपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स आइटमों का बाजार एक करोड़ रुपये से अधिक का अनुमान है, जबकि कपड़ा व्यवसाय भी कमोबेश इतना ही होना पाया गया।