पिछले 20 साल से बदहाल रुद्रपुर रोडवेज बस अड्डे के दिन आखिरकार बहुरने लगे हैं। तमाम समस्याओं और जर्जर भवन के बीच काम करने वाले कर्मचारियों की परेशानियों के साथ-साथ अब यात्रियों की सुविधा के भी रास्ते खुलने लगे हैं। बस अड्डे की समस्या और जर्जर भवन की दशा को अमर उजाला लगातार प्रकाशित करता रहा है। अब इसका संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार ने रुद्रपुर बस अड्डे को टर्मिनल बस अड्डा बनाने का निर्णय लिया है।
अब इसके लिए सात करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि भी मंजूर हो गई है और तीन अगस्त से बस अड्डे की जर्जर बिल्डिंग ध्वस्त होनी शुरू होगी और नए की तैयारी। यह राज्य का पहला टर्मिनल बस अड्डा होगा। रुद्रपुर बस अड्डे के टर्मिनल के लिए दिल्ली की कार्यदायी संस्था इंफ्रा को भी काम की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। टर्मिनल का नक्शा भी तैयार हो गया है। तीन अगस्त को डीएम ऊधमसिंह नगर टर्मिनल बस अड्डे के नक्शे पर अपनी मुहर लगाएंगे।
पिछले 20 वर्ष से बदहाल रोडवेज भवन और परिसर की बदहाल हालात से तमाम लोगों को भारी परेशानी से जूझना पड़ रहा था। जर्जर भवन में काम करने वाले कर्मचारी और अधिकारी भी कम दुखी नहीं रहते थे, बरसात में भवन के चारों तरफ से सीलन और पानी का टपकना आम बात होने लगी। कई बार स्थानीय स्तर पर अफसरों ने भवन की मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजे, लेकिन इस दिशा में निगम ने बजट का रोना रोते हुए इस ओर अपनी आंखों फेरे रखी।
एक जून 2015 से अमर उजाला ने रुद्रपुर रोडवेज की समस्याओं और बदहाल हालत पर अभियान चलाया तो धीरे-धीरे हालत बदलने लगे। सवारियों के लिए मूलभूत सुविधाएं मिलनी शुरू हुई, लेकिन जर्जर भवन की ओर आला अफसरों का ध्यान ही नहीं गया, अमर उजाला ने आइना दिखाया तो भवन के साथ-साथ पूरे बस अड्डे ही तस्वीर ही बदलने की कोशिश हो गई और अब यह बस अड्डा जल्द ही टर्मिनल का रूप लेगा।
रुद्रपुर रोडवेज बस अड्डा टर्मिनल बस अड्डा बनने जा रहा है। तीन जुलाई को इसका नक्शा लेकर विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक है। इसमें कहां-कहां क्या अड़चन आएगी यह देखना है। जिला प्रशासन भी इस दिशा में हर संभव मदद करेगा। यहां पर सिडकुल होने के कारण भी रुद्रपुर को एक अच्छे बस अड्डे की जरूरत थी, टर्मिनल बनने से यात्रियों को बहुत सी सुविधाएं मिलेंगी।
रुद्रपुर रोडवेज बस अड्डे को टर्मिनल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके निर्माण पर खर्च होने वाली लागत साढ़े सात करोड़ रुपये से अधिक है। दिल्ली की कार्यदायी संस्था को बिल्डिंग के निर्माण का जिम्मा सौपा गया है। ढाई करोड़ रुपये की धनराशि सिक्योरिटी के तौर पर जमा करा दी गई है। दो या तीन अगस्त से जर्जर बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण शुरू हो जाएगा। टर्मिनल का नक्शा तैयार हो गया है।