इस बार दशहरे के लिए रावण का 70 फुट ऊंचा पुतला बनाया जा रहा है। पिछले सालों की तुलना इस बार रावण के पुतले के कद 10 फीट बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही पुतला जलने से पहले आंखों से अंगारे निकलते हुए दिखाई देंगे।
गांधी पार्क में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों को बनाने का काम हो रहा है। रामपुर के बिलासपुर निवासी मुन्ना और सुभान पुतले बनाने में जुटे हैं। उनका परिवार तीन पीढि़यों से पुतले बनाने के काम में जुटे हैं। सुभान ने बताया कि चार महीने पहले से रावण का पुतला बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाता है। पहले से तैयार ढांचों को दशहरे से चार दिन पहले गांधी पार्क में लाकर अंतिम रूप दिया जाता है। पुतले का ढांचा तैयार करने के लिए हापुड़ से बांस मंगाया जाता हैं। विशेष चमकीला कागज दिल्ली से मंगाया जाता है।
इस साल तैयार किए जा रहे पुतलाें में कईं खासियत हैं। पिछले साल रावण के पुतले का कद 60 फुट था, जिसे इस साल 10 फुट बढ़ाकर 70 फुट किया गया है। रावण के वस्त्रों को इस बार कागज के फूलों से सजाया जाएगा। उसकी मूछों को गोल आकार दिया गया है।इस साल पटाखों को पुतले के भीतर इस तरह लगाया जाएगा कि दहन के वक्त रावण के पुतले की आंखों और कानों से अंगारे निकलेंगे।
दो लाख रुपये से रावण और मेघनाद बनकर हुए तैयार
काशीपुर के श्रीराम लीला मैदान में होने वाली श्रीराम लीला में दशहरा के दिन दहन होने वाले रावण और मेघनाद के पुतले बनकर खड़े हो गए हैं। इसका दहन दशहरे पर विधि-विधान के साथ किया जाएगा। इस बर दोनों पुतलों को बनाने में दो लाख से अधिक का खर्च आया है। श्रीराम लीला कमेटी के मुकेश कुमार ने बताया कि इस बार रावण का पुतला 55 फुट और मेघनाथ का पुतला 50 फुट ऊंचा है। पुतला बनाने में 12 लोगों की टीम को 15 से 16 दिन लगे।
राजस्थानी नागरी पहनेगा दसानन
रुद्रपुर। हर साल रावण के पुतले को आकर्षक दिखाने के लिए बदलाव किए जाते हैं। इस बार रावण के जूतों में बदलाव किया गया है। रावण को जूतों की जगह राजस्थानी नागरी पहनाई जाएगी। सोने के रंग के तामड़ा कागज से राजस्थानी नागरी तैयार की जाएगी। सुभान ने बताया कि वे हमेशा की तरह पुतलों को बेहतर से बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।