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बेगार को खत्म करने के लिए उग्र होगा आशा आंदोलन

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रुद्रपुर में आशा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते संगठन के प्रदेश महामंत्री डॉ. कैलाश पांडेय। - फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर/गदरपुर/किच्छा/बाजपुर। 12 सूत्री मांगों के लिए आशा कार्यकर्ताओं का कार्य बहिष्कार शुक्रवार को पांचवें दिन भी जारी रही। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि बेगार यानी मूल्य चुकाए बिना श्रम कराने के विरोध के लिए आशा आंदोलन और अधिक उग्र किया जाएगा।
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रुद्रपुर जिला अस्पताल में आशा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के प्रदेश महामंत्री डॉ. कैलाश पांडेय ने कहा कि प्रदेश की साढ़े 13 हजार आशा कार्यकर्ताओं ने कोरोना महामारी के दौरान फ्रंट लाइन वर्कर की भूमिका निभाई। इसके बावजूद सरकार उन्हें 21 हजार रुपये वेतन व राजकीय कर्मचारी का दर्जा देने से कतरा रही है। आशा कार्यकर्ताओं को नाममात्र का मानदेय देकर उनसे एक तरफ बेगार करवाया जा रहा है। आरोप लगाया कि भारतीय मजदूर संघ का आशा आंदोलन के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। ये बेहद शर्मनाक है। संगठन की जिला अध्यक्ष ममता पानू ने सरकार को महिला विरोधी बताया। वहां पर प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप, कुलविंदर कौर, रूपा देवी, रेखा, बबीता, सुनीता रानी, माया, सुमन आदि थे। इधर, गदरपुर में उत्तरांचल महिला पंजाबी महासभा की प्रदेश अध्यक्ष शिल्पी अरोरा ने धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन किया। उन्होंने धरनास्थल पर आशाओं के लिए कूलर और पानी की व्यवस्था भी कराई। वहां पर किशोर हालदार, रोबिन हंस, साहिल गुंबर, फरमान अली, माया देवी, प्रेमलता कश्यप, लक्ष्मी देवी, लक्ष्मी रावत आदि थे। वहीं, किच्छा सीएचसी में ममता रानी, कुलविंदर कौर, सिमरन कौर, हेमा अरोरा, नीता पांडे, कमला कोरंगा, प्रिया कश्यप, पूनम गंगवार आदि ने प्रदर्शन किया। इधर, बाजपुर में आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की ब्लॉक सचिव अर्चना के नेतृत्व में निशा, गीता, पूनम, रेखा यादव, मनेती, मनोज देवी, रूपेंद्र कौर, प्रेेमा आदि ने धरना दिया।
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