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मूल्य समर्थन योजना में फंस सकते है कई राइस मिलर, भौतिक सत्यापन शुरू

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काशीपुर। चालू विपणन वर्ष की समर्थन मूल्य योजना में राइस मिलरों और कच्चा आढ़तियों की ओर से भारी अनियमितताएं बरती जाने की शिकायत पर जांच शुरू हो गई है।
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उपसंभागीय विपणन अधिकारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम मिलों की ओर से की गई खरीद का भौतिक सत्यापन कर रही है। अब तक छह मिलों का स्टॉक चेक किया जा चुका है। जांच के बाद कई मिलों पर गाज गिरने की संभावना है।
शुक्रवार से उपसंभागीय अधिकारी वेदप्रकाश धूलिया के नेतृत्व में काशीपुर के एसएमओ मनोज मनराल, रामनगर के एसएमओ अशोक कुमार और हल्द्वानी के एसएमओ कृष्ण कुमार ने काशीपुर में पंजीकृत राइस मिलरों और कच्चा आढ़तियों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन शुरू किया।
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काशीपुर में लक्ष्य से अधिक खरीद में कई राइस मिलरों की भूमिका संदेह के दायरे में है। अनियमितताएं पाए जाने पर दोषी राइस मिलरों के खिलाफ भी केस दर्ज हो सकता है। एसएमओ काशीपुर केंद्र में करीब सात हजार क्विंटल और सहकारी खरीद केंद्रों पर मात्र 15 हजार क्विंटल धान की खरीद हो सकी है, जबकि पंजीकृत राइस मिलों ने 11 लाख क्विंटल से अधिक धान खरीद डाला।
वास्तव में खरीद पोर्टल पर प्रदर्शित स्टॉक के मुकाबले काफी कम बताई जा रही है। विभाग की जांच के बाद गड़बड़ी पाए जाने पर जसपुर में पांच राइस मिलरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। खसरे में खड़ा है गन्ना और खतौनी में काश्तकार ने बेच दिया धान
काशीपुर। मूल्य समर्थन योजना में बृहद पैमाने पर धांधली का मामला चर्चा में है। तमाम ऐसे काश्तकार हैं, जिनके खसरे में गन्ना और दूसरी फसलें उग रही है जबकि मंडी में उनकी खतौनी पर धान तुल रहा है।
राइस मिलरों ने बिचौलियों के माध्यम से किसानों की खतौनियां एवं आधार कार्ड के आधार पर इस योजना में उनका पंजीकरण करा दिया। खतौनी के आधार पर धान की खरीद दर्शाकर सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास किया।
पोर्टल पर काशीपुर में 11 लाख क्विंटल से अधिक धान खरीद होने के आंकड़े दर्ज है जबकि भौतिक रूप से राइस मिलरों के पास इतना स्टाक नहीं है। बिचौलियों के माध्यम से काश्तकारों की खतौनियां एवं आधार कार्ड लेकर 50 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कमीशन दिया गया।
सीबीएस सुविधा से राइस मिलरों की ओर से जिन काश्तकारों के खातों में रकम जमा कराई गई है, उनसे कमीशन की राशि काटकर राइस मिलरों से उनसे रकम वापस ले ली।
किसानों के लिए फजीहत बनी मूल्य समर्थन योजना
काशीपुर। मूल्य समर्थन योजना का नुकसान काश्तकारों को उठाना पड़ा। किसानों की फसल की खरीद बिचौलियों के माध्यम से निर्धारित मूल्य से 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल कम दामों पर की गई। खुली मंडी में धान इस वर्ष 1500 रुपये से लेकर 1650 रुपये तक बिका।
वहीं, आढ़तियों को भी इस योजना से नुकसान उठाना पड़ा। मंडी में आने वाला धान सीधे राइस मिलरों ने खरीद लिया। काश्तकारों के खाते में धान मूल्य के सीधे भुगतान करने से आढ़तियों की वह रकम भी रुक गई, जो उनकी ओर से किसानों को बतौर ब्याज एडवांस में दी गई थी।
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