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आपसी रस्साकशी में फंसी कांग्रेस, साढ़े तीन दशकों की हार से नही लिया सबक

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आरडी खान
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काशीपुर। कांग्रेस की परंपरागत सीट रही काशीपुर में साढ़े तीन दशक बाद भी स्थितियां पार्टी के अनुकूल नहीं दिख रहीं हैं। प्रांतीय नेतृत्व भले ही एकजुट होकर विधानसभा चुनाव में उतरने का दंभ भर रहा हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर कांग्रेस छितराई हुई है। टिकट की दावेदारी के लिए महानगर अध्यक्ष का कथित ऑडियो वायरल होने के बाद पार्टी में दो प्रमुख शक्ति केंद्र बन गए हैं। पार्टी के घोषित कार्यक्रमों में भी कांग्रेसी एकजुट नजर नहीं आ रहे हैं।
यूपी, उत्तराखंड के पूर्व सीएम एनडी तिवारी की कर्मभूमि रहे काशीपुर में दशकों तक कांग्रेस अजेय रही। वर्ष 1987 के विस चुनाव में अकबर अहमद डंपी के रूप में संयुक्त विपक्ष का मजबूत प्रत्याशी होने से कांग्रेस की नींव हिल गई। तब डंपी ने कांग्रेस के प्रत्याशी अम्मार रिजवी को शिकस्त दी थी। तब से काशीपुर की राजनीतिक जमीन कभी कांग्रेस के प्रति उपजाऊ नहीं रही। पिछले 20 सालों से हरभजन सिंह चीमा भाजपा से विधायक हैं। चीमा के राजनीतिक संन्यास की घोषणा के बाद भाजपा में भी टिकट के लिए घमासान की स्थिति है। इस अंतर्विरोध का फायदा आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को होने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन पिछले माह वायरल कांग्रेस महानगर अध्यक्ष संदीप सहगल के कथित ऑडियो ने कांग्रेस में खलबली मचा दी।
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इस मामले से कांग्रेस में टिकट के दावेदारों के बीच खाई और बढ़ गई है। इस ऑडियो में कथित रूप से महिला नेता का विरोध करने की बात कही गई है। महानगर अध्यक्ष सहगल ने इस टेप को कूटरचित बताकर इसे विरोधियों का षड्यंत्र बताया था, लेकिन एक गुट उनकी सफाई पर यकीन नहीं कर रहा है। इस बीच पार्टी के बैनर तले तीन कार्यक्रम हो चुके हैं लेकिन महानगर अध्यक्ष के नेतृत्व में होने वाले कार्यक्रमों के समानांतर दूसरा गुट भी कार्यक्रम कर रहा है। पूर्व पीएम स्व. इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर भी दोनों गुटों के अलग कार्यक्रम हुए। इसके बाद शिवालयों पर हुए जलाभिषेक कार्यक्रम को लेकर भी प्रमुख नेताओं के बीच दूरियां दिखीं।
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रविवार को पेट्रोल पंपों पर हुए विरोध, प्रदर्शन में भी कार्यकर्ता दो गुटों में बंटे थे। महानगर अध्यक्ष संदीप के नेतृत्व में होने वाले कार्यक्रमों में महिला कार्यकर्ता बहुत कम पहुंचीं। महानगर अध्यक्ष संदीप का कहना है कि कार्यकर्ताओं के बीच कोई मनभेद नहीं है। पार्टी नेतृत्व का आदेश ही निकटतम पेट्रोल पंपों पर प्रदर्शन करने का था, ऐसे में जिसे जहां सुलभ लगा, वह वहां कार्यक्रम में शामिल हो गया। वहीं कांग्रेस नेत्री मुक्ता सिंह का कहना है कि उनके नेतृत्व में अभी कोई कार्यक्रम नहीं हुआ है। हालांकि किसान कांग्रेस के कुछ कार्यक्रमों में बुलाने पर वह उनमें मौजूद रहीं। महानगर इकाई की ओर उनके पास कोई बुलावा नहीं आता। इस कारण उन कार्यक्रमों में वह शामिल नहीं हो पा रहीं हैं।
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