भूमि मुआवजा घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को मिली सितारगंज तहसील की एफएसएल रिपोर्ट में पटवारी की रिपोर्ट में ओवरराइटिंग होने के साथ ही मिसलबंद रजिस्टर के आठ पन्नों को फाड़ने की पुष्टि हुई है। रजिस्टर में बैक डेट के आठ वाद चढ़ाए गए थे। इन पर तत्कालीन एसएलओ डीपी सिंह ने आठ करोड़ का मुआवजा दिया था।
एसआईटी के अनुसार सितारगंज तहसील में तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फोनिया की ओर से 143 की आठ रिपोर्ट तैयार की गई थी। इन्हें पेशकार संतराम की ओर से मिसलबंद रजिस्टर में बैक डेट में चढ़ाया गया था। मामला खुलने पर संतराम ने मिसलबंद रजिस्टर के उन आठ पन्नों को फाड़ दिया, जिनमें बैक डेट में आठ वाद चढ़ाए गए थे।
इन्हीं वादों पर डीपी सिंह की ओर से काश्तकारों को आठ करोड़ का मुआवजा भी दिया गया था। संतराम ने एसडीएम के समक्ष जांच अधिकारी की मौजूदगी में शपथ पत्र देकर अपने बयानों में भी इस बात को कबूल कर लिया है। एफएसएल रिपोर्ट में पटवारी की ओर से तैयार की गई 143 की रिपोर्ट को एसएलओ दफ्तर में बदले जाने की भी पुष्टि हुई है। इसके आधार पर तहसील के कुछ और कर्मचारियों के खिलाफ भी एसआईटी कार्रवाई कर सकती है।
तीन हजार पन्नों का बन सकता है आरोप पत्र
रुद्रपुर। भूमि मुआवजा घोटाले में दूसरा आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी एसआईटी ने पूरी कर ली है। जेल में बंद तहसीलदार मोहन सिंह, पीसीएस अफसर अनिल शुक्ला, पेशकार संतराम, चकबंदी अधिकारी अमर सिंह और सहायक चकबंदी अधिकारी गणेश प्रसाद निरंजन के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया जाना है। बताया जा रहा कि तीन हजार पन्नों का आरोप पत्र एसआईटी की ओर से तैयार किया जा रहा है। इसे 10 दिन में कोर्ट में दाखिल कर दिया जाएगा।
भूमि मुआवजा घोटाले में एसआईटी के लिए एफएसल जांच फिर एक बार मददगार साबित हुई है। तीन दिन पूर्व मिली सितारगंज तहसील की एफएसल रिपोर्ट में सितारगंज तहसील के मिसलबंद रजिस्ट्रर को फाडने की पुष्टि भी हो गई है।