औद्योगिक शहर में हजारों ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं लेकिन शहर में एक भी ईवी चार्जिंग स्टेशन नहीं है। ऐसे में ये ई-रिक्शा को घरेलू कनेक्शन से चार्ज किया जा रहा है। इससे ऊर्जा निगम को रोजाना हजारों रुपयों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
एआरटीओ कार्यालय में वर्तमान में 6424 ई रिक्शा पंजीकृत हैं। इनका सवारी ढोने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कई ई-रिक्शा में माल भी ढोया जाता है। इतनी तादाद में ई-रिक्शा होने के बावजूद शहर में कहीं भी चार्जिंग स्टेशन नहीं है।
ऊर्जा निगम ने इलेक्ट्रानिक वाहनों के चार्ज करने के नियमानुसार अलग से एक श्रेणी बनाई है, जिसमें ईवी वाहनों को चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन को बिजली सप्लाई की जाती है। एक ई-रिक्शा को चार्ज करने में रोजाना औसतन नौ यूनिट खर्च होती हैं। ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए प्रति यूनिट 6 रुपये 25 पैसे प्रति यूनिट चार्ज किया जाता है।
वर्तमान में चल रहे 6424 ई-रिक्शा घरेलू कनेक्शन से चार्ज हो रहे हैं। घरेलू कनेक्शन में प्रति यूनिट पांच रुपये चार्ज होता है। घरेलू और ईवी चार्जिंग स्टेशन के चार्ज में एक रुपये 25 पैसे प्रति यूनिट का अंतर है। इस हिसाब से 6424 पंजीकृत ई रिक्शाओं के कारण रोजाना ऊर्जा निगम को करीबन 72270 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किच्छा में पकड़ा जा चुका है एक मामला
किच्छा में एक वर्कशॉप की आड़ में घरेलूू कनेक्शन से भारी संख्या में ई रिक्शा चार्ज करने का मामला पकड़ा जा चुका है। वर्कशॉप मालिक के खिलाफ जुर्माना लगाकर केस दर्ज कराने की कार्यवाही की गई थी।
पूरे जिले में कई जगहाें पर ईवी चार्जिंग प्वांइट लगाने की योजना है। सिडकुल में जिंजर होटल के पास ईवी चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना है। घरेलू कनेक्शन से ई रिक्शा चार्ज करने वालों के खिलाफ समय समय कार्यवाही की जा रही है। घरेलू कनेक्शन से ई रिक्शा चार्ज करने पर रोजाना विभाग को हजारों रुपयों का नुकसान हो रहा है।
- शेखर चंद्र त्रिपाठी, मुख्य अधीक्षण अभियंता, ऊर्जा निगम