ऊधमसिंह नगर के सीमांत क्षेत्र खटीमा से सटी नेपाल सीमा पर दोनों देशों की बीच आवाजाही के लिए कोई घोषित रास्ता नहीं है। इस कारण नोमेंस लैंड और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों नगरा तराई और मेलाघाट के पास जंगलों से चोर रास्तों से गुजरकर नेपाल जाते हैं।
खटीमा स्थित भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय खुली सीमा पर मैत्री गेट निर्माण के लिए संस्कृति विभाग को 72.43 लाख रुपये का बजट मिल गया है। यह पैसा लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित होते ही दो मित्र देशों की सीमा पर पहली बार मैत्री गेट भी बनना शुरू हो जाएगा। मैत्री गेट बनने से दो पुराने मित्र राष्ट्रों के बीच की मित्रता और अधिक मजबूत होने की संभावना बढ़ जाएगी।
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ऊधमसिंह नगर जिले के सीमांत क्षेत्र और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गृहक्षेत्र खटीमा से सटी नेपाल सीमा पर दोनों देशों की बीच आवाजाही के लिए कोई घोषित रास्ता नहीं है, इस कारण नोमेंस लैंड और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों नगरा तराई और मेलाघाट के पास जंगलों से चोर रास्तों से गुजरकर नेपाल जाते हैं। इन चोर रास्तों में तस्करी की घटनाएं सामने आने पर कई बार सीमा पर तैनात एसएसबी और पुलिस को आम लोगों से भी पूछताछ करनी पड़ती है।
लोनिवि खटीमा के ईई राजकुमार और जेई प्रकाश बताते हैं कि नेपाल से सटे मेलाघाट क्षेत्र में मैत्री गेट निर्माण के लिए संस्कृति विभाग को 72.43 लाख रुपये का बजट मिल गया है। जैसे ही यह बजट लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित होगा टेंडर निकालकर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
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खटीमा में नेपाल सीमा के पास मैत्री गेट बनने से दोनों देशों के लोगों को आवाजाही में निश्चित रूप से सुविधा होगी। यह मैत्री गेट मुख्यमंत्री की घोषणा में भी शामिल है। बजट को लेकर लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली जा रही है। - उदयराज सिंह, डीएम।
यह भी जानें
बनबसा में नेपाल जाने के लिए घोषित मार्ग है लेकिन वहां पर भी दो पड़ोसी देशों के बीच मित्रता का प्रतीक कोई गेट नहीं है।
खटीमा में मैत्री गेट को सीएम धामी ने घोषणा में शामिल किया है।
इस कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग को इसकी कार्यदायी संस्था बनाया गया है।