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पक्के मकान की आस में झोंपड़ी से भी हाथ धो बैठी लीलावती

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ग्राम रामनगर काशीपुर में अर्द्धनिर्मित मकान में खड़ी लीलावती। - फोटो : KASHIPUR
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चार साल पहले पीएम आवास योजना में लीलावती के नाम का चयन हुआ तो उसके पक्के मकान की आस बंधी। लंबे इंतजार के बाद उसे 60 हजार रुपये की पहली किस्त मिली। यह राशि मकान की बुनियाद और दीवारें खड़ी करने पर खर्च हो गई। सिर छिपाने को छत डालने के लिए लीलावती को अब दूसरी किस्त का इंतेजार है। फिलहाल उसने अपने बेटों के साथ देवर के मकान में शरण ली हुई है।
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ग्रामसभा रामनगर-काशीपुर निवासी लीलावती बेहद जरूरतमंद है। सरकार की ओर से उसे दो डेसीमल का आवासीय पट्टा दिया गया था। करीब पंद्रह वर्ष पूर्व उसका पति बिंदा प्रसाद रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया। उसके बाद उसका कहीं कोई पता नहीं लग सका। पट्टे की जमीन पर झोंपड़ी डालकर रह रही लीला ने मजदूरी कर अपने दोनों बेटों मनोज और संजय का पालन पोषण किया। उसके दोनों बेटे भी मजदूरी करते हैं। वर्ष 2018-19 की योजना में लीलावती का चयन प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए किया गया। इस ग्राम सभा से कुल 28 पात्रों का चयन हुआ था।
आवास मंजूूर होने के बाद लीलावती समेत दूसरे पात्र आर्थिक सहायता के ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी के चक्कर लगाते रहे। दो माह पूर्व गांव में सिर्फ सात पात्रों के खाते में इस योजना की पहली किस्त के रुप में 60-60 हजार रुपये की राशि आई है। लीला ने बताया कि खाते में पहली किस्त आने के बाद पक्के मकान को लेकर उसकी आस बंध गई। किस्त की रकम से उसने अपनी झोंपड़ी को हटाकर बुनियादें खुदवाईं और मकान का निर्माण शुरू किया। सरकार से मिला पूरा पैसा लगा देने के बाद उसने अपनी जमा पूंजी भी इसमें खर्च कर दी। इसके बावजूद अभी तक मकान लिंटर की स्थिति तक नहीं पहुंच पाया है।
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पूरा पैसा लग जाने के बाद वह अब दूसरी किस्त का इंतजार कर रही है। किस्त के बारे में जानकारी करने के लिए वह ब्लॉक से लेकर सीडीओ कार्यालय तक के चक्कर लगा चुकी है। पैसे के अभाव में काम रुक जाने से उसके परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उसके देवर का मकान भी ज्यादा बड़ा नहीं है। शीत ऋतु शुरू होने के चलते आगे और दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पूर्व प्रधान पंकज मोनू का कहना है कि प्रधानों और ग्राम सचिवों को योजना के क्रियान्वयन के प्रति गंभीरता दिखानी चाहिए। पात्रों को किस्तें समय से मिले, इसके लिए उन्हें समय रहते प्रयास करने चाहिए।
पीएम आवास योजना में लाभार्थी का मकान लिंटर तक आने की स्थिति में ग्राम सचिव की रिपोर्ट के आधार पर दूसरी किस्त के लिए प्रस्ताव परियोजना निदेशक को भेजा जाता है। केंद्र से बजट आवंटित होने पर राशि लाभार्थी के खाते में भेज दी जाती है।
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चिंताराम आर्य, खंड विकास अधिकारी, काशीपुर।
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