सितारगंज। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने मंगलवार को सितारगंज के एसडीएम व तहसील कार्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने एसडीएम के पेशकार के कक्ष में छह-सात माह पुरानी फाइलें देखकर नाराज हो गए। कमिश्नर ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए डीएम को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।
मंगलवार को कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने एसडीएम कोर्ट के वादों की फाइलों का निरीक्षण किया। कमिश्नर ने बताया कि सितारगंज के एसडीएम कोर्ट में 65 ऐसे मामले सामने आएं हैं जो तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। उन्होंने कहा कि कोई फाइल कोर्ट में आती है तो वह दर्ज होनी चाहिए। जांच में छह-सात माह से पेशकार कक्ष में रखी कई फाइलें मिली जो कोर्ट में कहीं दर्ज नहीं हैं। इस पर कमिश्नर ने डीएम को कमियों के साथ निरीक्षण रिपोर्ट भेजकर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।
उन्होंने लंबित वादों में समय से साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर लेखपाल व पैरवी न करने पर एडीजीसी का स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। उन्होंने उपजिलाधिकारी न्यायालय वाद पंजिकाओं का परीक्षण किया व पंजिकाओं का उचित रख रखाव के निर्देश दिए। एसडीएम रवीन्द्र कुमार जुवांठा ने बताया कि न्यायालय में जनवरी तक 418 राजस्व वाद पंजीकृत हैं। 22 वादों का निस्तारण किया गया। इस दौरान कमिश्नर ने जनसमस्याएं सुनी व अधिवक्ताओं से भी संवाद किया। कुमाऊं कमिश्नर ने सितारगंज चीनी मिल के 22 मेगावाट के पॉवर प्लांट का निरीक्षण भी किया। वहां पर एडीएम अशोक कुमार जोशी, तहसीलदार पूजा शर्मा आदि थे।