लोहियाहेड जल विद्युत परियोजना की बरसात से पहले दूसरी टरबाईन के चालू होने का लाभ परियोजना को मिलने लगा है। अप्रैल माह में दूसरी टरबाइन के चालू होने पर जो उत्पादन 12 से 15 मेगावाट हो रहा था वह बढ़कर 25 मेगावाट हो गया है। जिसका मुख्य कारण पहाड़ों पर वर्षा का होना और बर्फ का पिघलना है।
पहाड़ों पर वर्षा होने और वर्ष पिघलने से पावर हाउस को मिलने वाले पानी की सप्लाई 3500 से बढ़कर 5500 क्यूसेक पहुंच गई है। इस संबंध में पूछने पर उपमहाप्रबंधक जीएस बुदियाल ने बताया कि बरसात से पहले अप्रैल के अंतिम सप्ताह में दूसरी टरबाइन के रिनोवेशन का काम पूरा होने से परियोजना का उत्पादन बढ़ गया है।
कहा कि वर्षा और बर्फ पिघलने से पानी की मात्रा बढ़ी है। इस कारण दो टरबाइनों से 22 से 25 मेगावॉट उत्पादन हो रहा है। उन्होंने कहा कि दो टरबाइनों को 7000 क्यूसेक पानी की जरूरत होती है जिससे करीब 30 मेगावाट उत्पादन हो सकता है। उपमहाप्रबंधक बुदियाल ने कहा कि उनका प्रयास है कि तीसरी टरबाइन के रिनोवेशन का काम अक्तूबर के बजाय जुलाई में ही पूरा कर लिया जाय।