काशीपुर। कुमाऊं कमिश्नर राजीव रौतेला ने बतौर मुख्य अतिथि मंगलवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की गौविषाण टीले में लगाई गई छह दिनी चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को पुरातत्व स्थलों और उनसे जुड़े इतिहास की जानकारी दी जानी चाहिए। यह काम पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को करना चाहिए।
विश्व धरोहर सप्ताह पर भारतीय पुुरातत्व सर्वेक्षण देहरादून मंडल के काशीपुर सर्किल की ओर से गौविषाण टीले में उत्तराखंड के पुरातत्व स्थलों की प्रदर्शनी लगाई गई। कमिश्नर रौतेला ने कहा कि सरकार पुरातत्व विभाग कुमाऊं मंडल पौराणिक मंदिरों के संरक्षित करने और सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। ये मंदिर हमें अपनी संस्कृति से परिचित कराते हैं।
अधीक्षक पुरातत्वविद एवं प्रदेश प्रभारी आरके पटेल ने कहा कि पुरातत्व विभाग की सबसे बड़ी उपलब्धि केदारनाथ में आई आपदा के बाद मंदिर और परिसर का पुराने रूप में लाना है। उन्होंने बताया कि केदारनाथ मंदिर के पास पानी के तीन कुंड थे, जिसमें से दो क्षतिग्रस्त हो गए। पुरातत्व विभाग क्षतिग्रस्त जल कुंडों को पुनर्जीवित करने में जुटा है।
जिलाधिकारी डॉ. नीरज खैरवाल ने कहा कि तीर्थद्रोण सागर और गौविषाण टीले के पर्यटन विकास योजना की डीपीआर शासन के पास मंजूरी के लिए भेजी गई है, जिसे जल्द मंजूरी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन केंद्र हेमपुर को पर्यटन विकास के रूप में विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। इससे पहले कई स्कूलों के बच्चों की कला एंव लिखित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में नगर आयुक्त बंशीधर तिवारी, आईआईएम के डायरेक्टर कुलभूषण बलूनी, सीडीओ मयूर दीक्षित, पुरातत्व सीनियर इंजीनियर रंजीत सिंह, संरक्षण सहायक एमएस रावत, सहायक अधीक्षण मनोज कुमार जोशी, कविता बिष्ट, नीरज वर्मा, राजीव पांडे पुरातत्व काशीपुर सर्किल प्रभारी अभिषेक सैनी, दीपराज लखेड़ा, पाल सिंह, एसडीएम सुंदर सिंह आदि रहे।