अगर नगर निगम में रहने वाले लोग गौवंशीय पशु पाल रहे हैं तो उनका पंजीकरण पशुपालन विभाग में करा लें। ऐसा न करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। गौवंशीय पशुओं को बेचने का रिकार्ड भी रखना होगा।
प्रदेश में गौवंशीय पशुओं की तस्करी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले साल अल्मोड़ा में लगे पशु मेले से खरीदकर ले जाए गए गौवंशीय पशुओं की जब अभिलेखों में दर्ज कराए पतों पर तस्दीक की गई तो एक भी पशु नहीं मिल सका। जिसके बाद मेले से पशु खरीदकर ले गए दौ सौ से अधिक लोगों पर मुकदमा भी दर्ज किया गया था। बढ़ती तस्करी को रोकने के मद्देनजर उनका पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पहले शहरी क्षेत्रों में यह कार्य नगर निगम और पालिका को सौंपा गया था, लेकिन उनके द्वारा दिलचस्पी न लेने पर करीब चार महीने पहले यह काम पशुपालन विभाग को सौंपा गया है। वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि निगम क्षेत्र में पाले जा रहे गौवंशीय पशुओं का रजिस्ट्रेशन पशु चिकित्सालय में किया जाएगा। एक गौवंशीय पशु के रजिस्ट्रेशन का शुल्क 50 रुपये है। जिसके बाद पशुपालक को सर्टिफिकेट जारी होगा और पशु को नंबर जारी कर उसके कान पर लगाया जाएगा। यदि कोई पशुपालक गौवंशीय पशु बेचता है तो उसे इसका रिकार्ड रखना होगा। गौवंशीय पशु की मृत्यु होने पर उसका पोस्टमार्टम कराना होगा। अगर पशुपालक ने ऐसा नहीं किया तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसका मकसद गौवंशीय अधिनियम का उल्लंघन होने से रोकना है। इसके लिए नगरनिगम/पालिका और पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा।