200 करोड़ रुपये के घाटे के चलते बंद की गई गदरपुर चीनी मिल की जड़े खोखली करने में उसके अपने ही कुछ अधिकारियों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। मिल के ही पांच अधिकारियों ने मिल के गोदाम से 967 चीनी की बोरियां गायब कर डाली।
मिल बंद होने के समय शिफ्टिंग की आड़ में कर्मचारियों ने बेहद शातिर ढंग से गबन को अंजाम दिया। एडीएम की जांच में कर्मचारियों की करतूत उजागर हुई और पांच कर्मचारी दोषी पाए गए। एडीएम ने पांचों दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए शासन को संस्तुति की है।
गदरपुर चीनी मिल को प्रदेश सरकार ने घाटे के चलते अक्टूबर में बंद कर दिया था। मिल बंद करने के खिलाफ किसानों और कर्मचारियों ने खासा रोष भी जताया था। अचानक मिल बंदी का मामला विधानसभा में भी खूब गूंजा था। किसानों के साथ ही विधायक अरविंद पांडे ने भी मिल बंदी का विरोध जताते हुए दोबारा शुरु करने की मांग की है।
जब मिल को घाटे के चलते बंद किया जा रहा है, उसी समय कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर चीनी की बोरियों के गबन का खेल कर डाला। बेहद सुनियोजित तरीके से शिफ्टिंग की आड़ में गोदाम से लाखों रुपयों की चीनी की बोरियां गायब कर डाली। बड़े पैमाने पर चीनी की बोरियां गायब होने से विभाग में हड़कंप मच गया था।
गन्ना एवं चीनी उद्योग सचिव के आदेश पर दो महीने पहले एडीएम आशीष भटगई ने जांच शुरु की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच रिपोर्ट में पांच अधिकारियों की लिप्तता उजागर हुई है। एडीएम ने पांचों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन को कर दी है।