काशीपुर। एटीएम से 16 लाख रुपये का गबन करने के मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने कंपनी के कस्टोडियन समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस ने दस लाख रुपये और एक कार भी बरामद की है।
सीएमएस इंफो सिस्टम, हल्द्वानी के शाखा प्रबंधक विजय सिंह ने 23 फरवरी को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी कंपनी विभिन्न बैंकों के एटीएम में कैश लोड करती है। काशीपुर में इस काम के लिए थाना साबिक निवासी देवेश यादव को कस्टोडियन एजेंट के रूप में नियुक्त किया था।
जांच में सामने आया कि एजेंट ने 16 लाख रुपये की हेराफेरी की है। देवेश ने एटीएम में 27 लाख की धनराशि लोड की और बाद में 16 लाख रुपये की निकासी दिखाकर रिपोर्ट बंद कर दी। पुलिस ने देवेश पर आईपीसी की धारा 406 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
शनिवार को मामले का खुलासा करते हुए एएसपी प्रमोद कुमार ने बताया कि कोतवाल संजय पाठक के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई थी। टीम ने मुरादाबाद रोड से थानासाबिक निवासी देवेश यादव, ग्वालियर (मध्यप्रदेश) निवासी अभिमन्यु, उमेश उर्फ गोलू, पालम कॉलोनी (दिल्ली) निवासी ओमपाल और ग्राम पांची मेरठ निवासी रवि कुमार को गिरफ्तार किया है।
इनकी निशानदेही पर दस लाख रुपये की रकम, एक कार, दो टूल किट, एक कीबोर्ड और दो एडमिन कार्ड भी मिले हैं। एएसपी के मुताबिक केस में आपराधिक साजिश का खुलासा होने पर धारा 406 के साथ ही धारा 409 और 120 बी का इजाफा किया गया है। टीम में एसएसआई देवेंद्र गौरव, एसआई आरएस बिष्ट, सुनील तोमर, कैलाश चंद्र, दिनेश चंद्र, कैलाश तोम्क्याल और गिरीश कांडपाल आदि थे।
एटीएम को हॉफ लॉक कर छोड़ देता था कस्टोडियन
काशीपुर। बैैंकों के एटीएम में कैश लोड करने वाले एजेंटो की ओर से करोड़ों की हेराफेरी किए जाने की बात सामने आ रही है। ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद के एक एटीएम से भी एजेंटों ने 15 लाख रुपये गबन कर लिए।
एएसपी प्रमोद कुमार ने बताया कि गबन के मामलों में कस्टोडियन की प्रमुख भूमिका रहती है। कस्टोडियन एटीएम को हाफ लॉक कर छोड़ देता है। उसके बाद कस्टोडियन के साथी एटीएम में घुसकर रकम निकाल लेते हैं। बाद में वह एटीएम को हैक कर डिटेल शून्य कर हार्ड डिस्क को खराब कर देते है। (संवाद)
ओमपाल और अभिमन्यु हैं एटीएम हैकर
काशीपुर। एएसपी प्रमोद कुमार ने बताया कि एटीएम हैक करने में ओमपाल और अभिमन्यु शातिर हैं। कई थाना क्षेत्रों में एटीएम से करोड़ों रुपये की रकम उड़ाए जाने के मामले में इन दोनों की भूमिका सामने आ रही है।
बैंकों की ओर से अक्सर ऐसे मामलों में एफआईआर नहीं कराई जाती। जिसका फायदा इस गिरोह के सदस्य उठा रहे हैं। इनसे संबंधित मुकदमों का ब्योरा एकत्र कर उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। (संवाद)