राज्य स्तरीय कायाकल्प टीम ने सरकारी अस्पताल का निरीक्षण किया तो तमाम खामियां उजागर हुईं। अस्पताल में अलग-अलग कूड़ेदान तो रखे हैं, लेकिन उनमें स्टिकर नहीं लगाए गए हैं। इससे कर्मचारी जैव चिकित्सीय कचरे को भी अन्य कचरे के साथ डाल रहे हैं।
बता दें कि केंद्र सरकार की कायाकल्प योजना के तहत अस्पताल का तीसरे चरण का मूल्यांकन सोमवार को देहरादून से आई टीम ने किया। टीम ने अस्पताल की छत, सभी कक्षों, ट्रामा केंद्र, रसोईघर, नमूना कलेक्शन कक्ष का निरीक्षण किया। साफ-सफाई, चादरों की धुलाई, टूट-फूट सहित अन्य व्यवस्थाओं को भी देखा। टीम ने नमूना कलेक्शन कक्ष में जैव चिकित्सीय कचरे के लिए रखे गए कूड़ेदान में नियमानुसार कचरा न मिलने, कूड़ेदान पर स्टिकर न लगाने पर तकनीशियन को डांटा। अस्पताल में शिकायत पेटी को खोलने के बारे में स्टाफ से जानकारी ली, लेकिन अस्पताल स्टाफ को पेटी खोलने की कोई जानकारी नहीं थी।
उन्होंने अस्पताल में चल रही रसोई, सफाई और ठेके से संबधित दस्तावेज मांगे, लेकिन स्टाफ दस्तावेज नहीं दिखा पाए। इस पर टीम के सदस्यों ने अस्पताल स्टाफ पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
टीम प्रभारी डॉ. अभय कुमार ने बताया कि हर साल निदेशालय की ओर से समस्त अस्पतालों की कायाकल्प के लिए निरीक्षण किया जाता है। एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल का तहसील और जिला स्तर का निरीक्षण हो चुका है। चार जनवरी तक रिपोर्ट आने के बाद भारत सरकार के मानकों के अनुसार अस्पताल योग्यता सूची में आता है तो अस्पताल के कायाकल्प के लिए धनराशि मुहैया कराई जाएगी। वहां पर अस्पताल प्रभारी अधीक्षक डॉ. मदन मोहन, संतोष भाष्कर, सीमा चौधरी आदि थे।
अस्पताल में जैव चिकित्सीय कचरा निस्तारण बड़ी समस्या है। जल्द ही इसका समाधान कर लिया जाएगा। टीम ने अन्य व्यवस्थाओं पर संतोष जताया है।
-डॉ. मदन मोहन, प्रभारी अधीक्षक, एलडी भट्ट राजकीय चिकित्सालय