जिले में कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में डीएम रंजना राजगुरु की अध्यक्षता में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत होने वाले कार्यों की समीक्षा की गई। डीएम ने कहा कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम का सही से अनुपालन किया जाए।
उन्होंने डॉक्टरों को निर्देश दिए कि अल्ट्रासाउंड व एक्सरे मशीन लगाने के लिए पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत समय से आवेदन किया जाए ताकि समिति आवेदनों का परीक्षण कर निस्तारण कर सके।
डीएम ने सीएमओ को निर्देश दिए कि जिन अस्पतालों ने अल्ट्रासाउंड मशीन के संचालन के लिए समय से नवीनीकरण नहीं किया गया है उनके खिलाफ पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करें। जिले में संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर प्रसव पूर्व लिंग जांच न हो। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम औचक निरीक्षण करे ताकि कन्या भ्रूण हत्या रोकी जा सके। डीएम ने जिला सलाहकार समिति के सदस्यों से कहा कि क्षेत्र में यदि कोई मामला सामने आता है तो सीएमओ को बताएं। यदि किसी अस्पताल की शिकायत प्राप्त हुई तो आरोप पुष्ट होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
समिति के समक्ष अल्ट्रासाउंड मशीन संचालन के लिए चार नए आवेदन प्रस्तुत किए गए। इनमें से मानकों के आधार पर जो सही पाए गए उनको समिति ने स्वीकृति दी। नौ आवेदन नवीनीकरण के लिए समिति के सम्मुख प्रस्तुत किए गए जिसमें से नियमानुसार आठ आवेदनों को समिति ने संस्तुति दी। नई अल्ट्रासाउंड मशीन को फार्म बी में अंकित किए जाने के लिए दो व एक आवेदन स्थान परिवर्तन के लिए प्रस्तुत किया गया जिसे समिति ने परीक्षण के बाद संस्तुति दी।
पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 के अंतर्गत एक नए रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किए गए जिनको समिति ने सहमति दीष वहां सीएमओ डॉ. डीएस पंचपाल, एडीएम जगदीश कांडपाल, एसीएमओ डॉ. हरेंद्र मलिक, अविनाश खन्ना, बरीत सिंह, डॉ. आरडी भट्ट, डॉ. एचपी गुप्ता, पीसीपीएनटीडी के जिला समन्वयक प्रदीप मेहर, सरोज सिंह ठाकुर, नसरीज कुरैशी, हीरा जंगपांगी, बिंदुवासिनी आदि थे।