काशीपुर। यह संयोग है कि कुदरत की कृपा एक साथ हिंदु, मुसलमानों और ईसाइयाें पर बरस रही है। नवरात्र पर जहां मंदिरों में शंख और घड़ियाल की मनमोहक आवाजें भक्तों को सुखद अनुभूति का एहसास करा रही है। वहीं मस्जिदों से गूंजने वाली अजान की सदायें लोगों को अपने रब की ओर बुला रही है। ईस्टर के उपलक्ष्य में क्रिश्चियन भी उपवास रख रहे हैं। साफ जाहिर है कि कुदरत भी अपने बंदों के बीच किसी तरह का दुराव नहीं रखती।
दो अप्रैल से हिंदू नववर्ष संवत्सर का आरंभ हो गया है। सनातन संस्कृति में चैत्र नवरात्र का अध्यात्मिक महत्व है। नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक माता के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्र में मां के भक्त उपवास रखकर नियमित पूजा-अर्चना करते है। वहीं, इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने में रमजान आता है। इस मुबारक माह की शुरुआत चांद के दिखने के साथ ही होती है। इत्तेफाक से चांद का दीदार भी शनिवार की शाम हो हो गया।
दो साल बाद गुलजार होंगे धार्मिक स्थल
काशीपुर। कोविड संक्रमण के चलते दो साल बाद मंदिर और मस्जिदें एक साथ गुलजार होंगे। कोरोना संक्रमण के कारण दो सालों से धार्मिक अनुष्ठानों पर भी रोक लगी हुई थी। इस दौरान न तो मंदिरों में कोई बड़े आयोजन हो सके और न ही दो सालों में मस्जिदों में तरावीह व ईद की नमाज हो सकी। (संवाद)
इस बार नवरात्र और रमजान एक साथ शुरु हो रहे है। पिछले दो साल महामारी में गुजरे। माता रानी से प्रार्थना है कि सभी तरह की आपदाओं का विनाश हो और मानव कल्याण हो।
-विकास कुमार अग्निहोत्री, मुख्य पंडा चैती मेला।
रमजान और नवरात्र का एकसाथ आना कौमी एकजहदी के लिहाज से अच्छा है। त्योहार साथ-साथ आते है तो आपसी भाईचारे की डोर और मजबूत होती है। त्योहार अमन-चैन बरकरार रखने का पैगाम देंगे।
मुफ्ती मुनाजिर हुसैन, शहर इमाम काशीपुर।
इस बार गुड फ्राइडे 15 अप्रैल को है। दो मार्च से उपवास चल रहे है। चालीस दिन के उपवास होते है। यह खुदा की मर्जी है कि सभी धर्मों के लोग मिलजुल कर अपने-अपने त्योहार मना रहे हैं।
डेजी रोज, विशप, क्रिश्चियन वैथसदा चर्च।
मुफ्ती मुनाजिर हुसैन, शहर इमाम।- फोटो : KASHIPUR
पंडा विकास अग्निहोत्री, मुख्य पंडा, चैतीमेला।- फोटो : KASHIPUR