बहुचर्चित ऊधमसिंह नगर डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक घोटाले का मुख्य आरोपी कैशियर मुकदमा दर्ज होने के नौ माह बाद सोमवार को आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस निलंबित कैशियर को मंगलवार को न्यायालय में पेश करने की तैयारी में है। इस मामले में आरोपी दो अन्य बैंक कर्मियों की बहाली हो चुकी है।
मार्च 2016 में ऊधमसिंह नगर डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक के स्थानीय शाखा में 84 खाताधारकों के खाते से करीब 46 लाख रुपये के गबन का मामला प्रकाश में आया था। 21 मार्च 2016 को समाचार पत्रों में गबन का मामला होने से पूर्व बैंक कर्मियों ने इस पर लीपापोती करने का भरसक प्रयास किया। मामला उजागर होने पर बैंक के महाप्रबंधक सीके कमल ने डीजीएम रैंक के दो अधिकारी हीरा राम, नरेश चंद को मामले की जांच सौंपी। प्रारंभिक विभागीय जांच में बैंक शाखा के कैशियर नरेश चंद, प्रबंधक शंकर सहाय, लिपिक माधवानंद की संलिप्तता उजागर होने पर तीनों को निलंबित कर दिया गया। खाताधारकों का रकम लौटाने एवं जांच पूरी करने के बाद डीजीएम हीरा राम ने स्थानीय पुलिस चौकी में कैशियर नरेश चंद, प्रबंधक शंकर सहाय, लिपिक माधवानंद के खिलाफ गबन की धारा 409 के तहत मामला दर्ज कराया। चौकी प्रभारी केजी मठपाल ने मामले की जांच शुरू की। शंकर सहाय, माधवानंद की अपील पर उच्च न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। कुछ दिन पूर्व बैंक ने दोनों को पुन: बहाल भी कर दिया। इधर पुलिस ने गबन के मुख्य आरोपी कैशियर नरेश की धरपकड़ के लिए कई बार उसके किच्छा, बरेली स्थित आवासों पर दबिश दी। सोमवार को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने नरेश को रुद्रपुर के डीडी चौक से धर दबोचा। चौकी प्रभारी केजी मठपाल ने बताया कि नरेश वहां से अन्यत्र भागने की फिराक में था।
खाते में मैनुअल इंट्री कर करते थे गबन
बैंक के 2014 में सीबीएस होने के बावजूद कैशियर ने कई खाताधारकों को लंबे समय तक कंप्यूटरीकृत खाता नहीं दिया। लेजर में इंट्री न कर खाता धारकों के मैनुअल खाते में जमा राशि की इंट्री कर रकम का गबन किया जाता रहा। मार्च 2016 में वार्ड नंबर एक के बाबूराम ने कंप्यूटरीकृत खाता हासिल कर मैनुअल खाते की इंट्री से मिलान करने पर 85 हजार, गुरुग्राम के श्रंकर राय के खाते से 40 हजार, देवनगर की रेखा विश्वास के खाते से 46 हजार रुपये का गबन होने की जानकारी होने पर मामला उजागर हुआ।