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खटीमा फाइबर्स फैक्टरी में वन भूमि की कब्जे वाली भूमि पर संयुक्त टीम ने लगाए निशान

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खटीमा में फाइबर्स फैक्टरी के अंदर कब्जे की वन भूमि का नापजोख करती टीम। संवाद - फोटो : KHATIMA
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खटीमा। खटीमा फाइबर्स फैक्टरी के कब्जे वाली वन भूमि का शनिवार को संयुक्त टीम ने सर्वे किया। टीम के सर्वेयरों ने कारखाने के अंदर तक डिर्माकेशन कर वन विभाग की जमीन की नाप जोख कर निशान लगाए।
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आरिक्षत वन भूमि पर खटीमा फाइबर्स के कब्जे का मामला वर्ष 2013-14 से ही सुर्खियों में था। तब वन विभाग के अधिकारियों ने मुकरान नाले के बाहर के कब्जे को ध्वस्त किया था लेकिन नाले के अंदर कारखाने की तरफ का कब्जा यह कहकर छोड़ा गया था कि उसमें कारखाने की मशीनें लगी हैं।
मशीनें हटाने के बाद वन भूमि स्वयं खाली कर ली जाएगी लेकिन वन भूमि खाली नहीं हो सकी। वन क्षेत्राधिकारी राजेंद्र मनराल ने बताया कि कारखाना प्रबंधक को कई नोटिस भेजे जा चुके थे लेकिन वनभूमि खाली नहीं हो सकी थी। उन्होंने कहा कि कारखाने के अंदर कब्जे की वन भूमि पर जो वर्ष 2014 में निशान लगाए गए थे वह अस्पष्ट हो गए थे इसलिए वन भूमि खाली कराने के लिए पुन: सर्वे किया जा रहा है। सर्वे कार्य दो से तीन दिन तक चलेगा।
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- खटीमा फाइबर्स की ओर से वन भूमि पर वर्ष 2013-14 में किया गया कब्जा पूरा नहीं हटाया जा सका था। तब कब्जे वाली आधी जमीन खाली करा ली थी। आधी भूमि में कारखाने की मशीनें लगी थी। तब यह सुनिश्चित हुआ था मशीन हटाने के बाद कारखाना प्रशासन खुद वन भूमि छोड़ देगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कारखाना प्रबंधक को बराबर जमीन खाली कराने बावत नोटिस भेजे गए थे लेकिन पहल नहीं होने पुन: सर्वे कर कब्जा खाली कराने की कार्रवाई शुरू की गई। राजस्व एवं वन विभाग की टीमें सुनिश्चित करेंगी कि वन व राजस्व विभाग की सीमा कहां तक है। आरईएस के अधिकारी वन भूमि खाली कराने में होने वाले खर्चे का आकलन करेंगे। सर्वे के बाद वन विभाग सख्ती से अपनी जमीन खाली करेगा।
-शिवराज चंद, उपप्रभागीय वनाधिकारी खटीमा।
- खटीमा फाइबर्स की वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत थी। वन विभाग अपनी भूमि की नापजोख कर रहा है। इसमें वन विभाग की सर्वे टीम के साथ राजस्व और आरईएस के अधिकारी-कर्मचारी भी है। यदि वन भूमि पर कब्जा पाया गया तो जमीन खाली कराई जाएगी। इस मामले में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। -रविंद सिंह बिष्ट, उपजिलाधिकारी खटीमा।
खटीमा फाइबर्स का वन विभाग से जमीन संबंधी कोई विवाद नहीं है। खटीमा फाइबर्स द्वारा वन विभाग से जमीन अधिकृत कराने संबंधी प्रक्रिया चल रही है। पॉलीप्लैक्स द्वारा भी जमीन अधिकृत करा चुुका है लेकिन खटीमा फाइबर्स की प्रक्रिया अभी जारी है। खटीमा फाइबर्स द्वारा वन भूमि कब्जाने की अफवाह फैला कर चंद लोग अपनी दुश्मनी निकाल रहे हैं। कारखाने और जंगल सीमा पर क्या हो रहा है उन्हें पता नहीं है। सुना गया कि वन विभाग के सर्वेयर नापजोख कर रहे है।
-राकेश चंद्र रस्तोगी, एमडी खटीमा फाइबर्स फैक्टरी।
सर्वे करने पहुंची टीम के लिए फैक्टरी का नहीं खुला गेट
खटीमा। आरोप है कि नापजोख को लेकर पहुंची टीम के लिए खटीमा फाइबर्स फैक्टरी खटीमा के दरवाजे नहीं खुले। संयुक्त टीम जंगल की तरफ से नाला पार कर कारखाने के कब्जे वाले हिस्से तक पहुंची। गेट नहीं खोलने की शिकायत पर एसडीएम रविंद्र सिंह बिष्ट मौके पर पहुंचे तब गेट खुला। एसडीएम बिष्ट ने बताया कि वह किसी भी स्थिति अतिक्रमण नहीं होने देंगे। इस मौके पर एसडीओ फारेस्ट शिवराज चंद, रेंजर राजेंद्र सिंह मनराल, वन दरोगा संतोष भंडारी, राजस्व निरीक्षक नवनीत चौहान आदि मौजूद थे।
सूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी का नहीं दिया गया जवाब
खटीमा। पुरनापुर गांधी नगर निवासी एवं खटीमा-मझोला सहकारी गन्ना विकास समिति पूर्व अध्यक्ष बलविंदर सिंह ने लोक सूचनाधिकार के तहत डीएफओ तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी से जानकारी मांगी है। उनका कहना है कि 29 दिसंबर 2021 को कई बिंदुओं पर मांगी गई सूचना की जानकारी उन्हें अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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