रुद्रपुर। सरकारी सिस्टम का भी अजब हाल है। जिले में बजट के अभाव में कई योजनाएं लंबे समय से रुकी हुई हैं जबकि 11 विभाग ऐसे हैं जो आवंटित बजट को खर्च ही नहीं पाए। अब 2357.28 लाख रुपये शासन को सरेंडर किए गए हैं। इन विभागों में वन विभाग, समाज कल्याण, महिला कल्याण, उद्यान विभाग, पशुपालन विभाग और डेयरी विकास विभाग आदि शामिल हैं। हद तो यह कि इससे सितारगंज सिंचाई खंड में सीएम की घोषणाओं के भी काम नहीं हो सके हैं।
विधानसभा चुनाव के चलते पंचायतीराज विभाग की ओर से 67.39 लाख रुपये खर्च नहीं हो सके थे। बताया जा रहा है कि यह पैसा मार्च में ही शासन की ओर से अवमुक्त किया गया। सिंचाई खंड सितारगंज में सीएम की घोषणा के छह लाख 93 हजार रुपये का बजट भी सरेंडर किया गया है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना में नौ बालिकाओं के आवेदन निरस्त होने के कारण दो लाख रुपये का बजट निदेशालय को सरेंडर कर दिया गया है।
किस विभाग ने कितना बजट लौटाया
विभाग अवमुक्त बजट सरेंडर राशि (लाख में)
वन विभाग 1124.84 219.231
सिंचाई खंड 492.38 72.99
समाज कल्याण 11674.6 717.04
महिला कल्याण 3367.09 0.79
उद्यान विभाग 42 0.00937
डेयरी विकास 29.766 3.28090
आपदा प्रबंधन 5868.36 1172.74
अल्पसंख्यक कल्याण 72.50 2.05
महिला सशक्तीकरण व बाल विकास 1109.92 162.53
पशुपालन 57.50 0.01
जिला उद्योग केंद्र 6.60 6.60
कुल 23845.556 2357.27127
(जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय से मिले आंकड़े के मुताबिक)
आपदा प्रबंधन की ओर से राज्य आपदा मोचन निधि के तहत मृतकों को राशि दी जाती है। बीते वर्ष कोविड-19 में 741 मृतकों को राशि दी गई है। इसके साथ ही आपदा के दौरान परिसंपत्तियों में हुए नुकसान के दौरान भी करोड़ों रुपये का बजट खर्च किया गया। 11 करोड़ 72 लाख रुपये अवशेष होने के चलते शासन को लौटा दिए गए हैं।
-उमा शंकर, जिला आपदा प्रबंधक अधिकारी।
पिछले वित्तीय वर्ष में जिन विभागों के पास विकास कार्यों और योजनाओं का बजट शेष रह गया था, उसे उन्होंने सरेंडर कर दिया है। बजट शासन को भेज दिया गया है। नये वित्तीय वर्ष में योजनाओं के अनुसार मांग भेजी जाएगी।
-आशीष भटगाईं, सीडीओ ऊधमसिंह नगर।