भास्कर ने जताया था झूठे मामले में फंसाने का अंदेशा
एलएलबी के छात्र भास्कर ने भी झूठे मामले में फंसाने का अंदेशा जताते हुए कप्तान से लेकर डीआईजी को पत्र भेजकर रिपोर्ट दर्ज करने की गुहार लगाई थी लेकिन इन प्रार्थना पत्रों पर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई और दो महीने बाद भास्कर पर केस दर्ज कर दिया गया। भास्कर ने हिरासत में छूटने के बाद डीआईजी और एसएसपी को भेजे शिकायती पत्र में कहा था कि 27 मार्च को गबन का आरोप लगाकर उनको रुद्रपुर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया था। कोतवाली पुलिस ने उनको एक कमरे में बंद रखा था। यहां पंखा, पानी, टायलेट की व्यवस्था नहीं की।
आरोप है कि एक संतरी उसके साथ गालीगलौज कर डराता था। इस दौरान पुलिसकर्मी उनको कंपनी की गाड़ी में मेवात हरियाणा भी ले गए थे। उसके भाई समीर पांडे ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष उसको नाजायज बंद करने का प्रार्थना पत्र दिया तो पुलिस आनन फानन में उसे मेवात से लेकर आ गई थी। पुलिस ने अदालत में रिपोर्ट दी कि भास्कर किसी अपराध में वांछित नहीं है। पांच अप्रैल की रात उसको छोड़ा गया था। भास्कर का कहना था कि यदि कोई अपराध होगा तो उसमें कंपनी के अधिकारी, कर्मचारियों की संलिप्तता होगी। उन्होंने दो मोबाइल और लैपटॉप भी जब्त करने की बात कही थी। भास्कर ने कोतवाली पुलिस पर शिकायती पत्र पर कार्रवाई नहीं करने पर डीआईजी और एसएसपी को शिकायती पत्र देने की बात कही थी लेकिन इस शिकायती पत्र पर निचले स्तर से लेकर आला अफसरों तक ने संज्ञान नहीं लिया।