सितारगंज। संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में आजीवन कारावास में सजायाफ्ता सात कैदी जो रिहा किए गए हैं, इनमें से चार कैदी अपनी पत्नी की हत्या के दोष में सजा काट रहे थे। जेल से छूटने के बाद चारों ने एक ही बात कही कि वे अपनी पत्नी के हत्यारे नहीं थे, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें अपराधी साबित कर दिया। इनमें से एक कैदी तो सजा सुनने के बाद से ही मुक्ति के लिए साधू बन गया और उसने 17 साल सात माह के कारावास के दौरान न उसने बाल कटवाए और न ही पैरों में चप्पल पहनी। यहां तक कि जेल में ईष्ट देवता (सुरमल), देवी (परी) की आराधना में ही लगा रहा।
शनिवार का दिन जेल के सात कैदियों के लिए जीवन की सबसे बड़ी खुशी लेकर आया। रिहा कैदी किशन राम ने बताया कि वह अपने मूल गांव डिगारा पट्टी में दिहाड़ी मजदूरी कर अपना परिवार चलाता था। वह शादी समारोह और तीज त्योहारों पर छोलिया नृत्य कर लोगों की वाहवाही लूटता था। लेकिन, 1999 में उसकी मां के देहांत के बाद चरस के नशे ने उसकी पत्नी माधवी देवी को उससे छीन लिया और वह उसका हत्यारा बन गया। पत्नी के मरने के बाद चारों बच्चे अनाथालय में पले और आज भी छोटी बेटी अल्मोड़ा शिशु सदन में रह रही है। दो बेटे हैं, जो सिडकुल में नौकरी कर रहे हैं।
गैंगरिन रोग से पीड़ित किशन ने बताया, जेल से 14 साल बाद गांव पहुंचा तो वहां न घर है और न ही कोई अपना। पत्नी माधवी की यादव में भावुक किशन ने बताया कि आज भी वह अपनी पत्नी से प्रेम करता है। उसकी आत्मा की शांति के लिए मंदिर बनाने की इच्छा है। बस्तड़ी पिथौरागढ़ के पुष्कर दत्त भट्ट बताते हैं कि 17 अक्तूबर 1999 को उनकी पत्नी पुष्पा देवी ने खुद को आग लगा ली। उस वक्त वह लुधियाना की ओसवाल कपड़ा कंपनी में मैनेजर था। पत्नी की मौत के बाद बड़ा बेटा हिमांशु घर पर ही रहा और छोटे बेटे को उसकी साली अपने घर नैनीताल ले गई, जहां रहकर वह 11वीं में हैं।
बताया कि पिछले साल भूस्खलन से उसका घर भी तबाह हो गया। अधोईवाला देहरादून के रविकांत उपाध्याय ने बताया कि वह डिग्री कॉलेज में क्लर्क था। 15 वर्ष नौकरी भी की। शादी के बाद एक साल की बेटी थी। इसी दौरान पत्नी उज्ज्वला ने फांसी लगा ली और उसे दहेज हत्या के मामले में आजीवन कैद हो गई। ईश्वरी राम सिपाही था। 1982 में पुलिस में भर्ती हुआ।
12 साल तक नैनीताल, पिथौरागढ़ जिले के विभिन्न थानों, कोतवाली में ड्यूटी की और ड्यूटी के दौरान कालाढूंगी ट्रेजरी में साथी सिपाही से झगड़ा हो गया। सिपाही ने उसका सिर फोड़ दिया और जब वह होश में आया तो साथी सिपाही मरा पड़ा था। उसे उसकी रायफल से गोली लगी थी। बताया कि परिवार में पत्नी पार्वती देवी, दो बेटे एवं दो बेटी हैं। बड़े बेटे की शादी हो चुकी है। अब उसका परिवार को यहीं कल्याणपुर गांव में रहता है। बताया कि पिता जीवन राम टेलर थे। उनसे उसने सिलाई सीखी थी। अब वह सिलाई कर परिवार चलाएगा।
सितारगंज सेंट्रल जेल से रिहा साधू पुष्कर दत्त भट्ट।
सितारगंज सेंट्रल जेल से बाहर आए समधी किशन राम, ईश्वरी राम।
किशन और ईश्वरी जेल में रहते समधी बने थे
सितारगंज। संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में आजीवन कारावास की सजा काटने के दौरान किशन राम और ईश्वरी राम दोनों घनिष्ठ मित्र बन गए। यहां तक कि एक-दूसरे के सुख दुख भी बांटने लगे। किशन और ईश्वरी दोनों को जब यह मालूम हुआ कि बच्चों में किशन की बेटी, ईश्वरी का बेटा बड़ा है तो दोनों ने अपनी दोस्ती को रिश्ते में बदल दिया और तत्कालीन वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्य के समक्ष बेटा-बेटी की शादी का प्रस्ताव रखा। आर्य ने भी उनके प्रस्ताव को मान लिया और जेल में आठ फरवरी 2014 को ईश्वरी, किशन राम समधी बन गए। उस दिन जेल में शहनाई गूंजी और फिर विनोद, संजना ने परिणय सूत्र में बंधकर मिसाल कायम कर दी। जेल से भी दोनों एक साथ रिहा हुए।