स्कूल से लौट रही छात्रा ने साहस का परिचय देते हुए एक बच्ची को संदिग्ध बाबा के चंगुल से मुक्त करा लिया। खुद को घिरा देख बाबा बच्ची को छोड़कर चलते टैंपो में बैठकर फरार हो गया। बिछुड़ी बच्ची को उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया है।
चैतीमोड़ निवासी गौरव विश्नोई धामपुर शुगर मिल में कार्यरत हैं। उनकी बेटी अनुश्री (15) कक्षा दस की छात्रा है। सोमवार दोपहर एक बजे वह सांई पब्लिक स्कूल से लौट रही थी। बाजपुर रोड पर उसने चार साल की बच्ची को एक संदिग्ध बाबा के पास बैठे देखा। वह थोड़ी आगे बढ़ी तो उसे एक महिला बदहवास हालत में रोते हुए सड़क पर जाती दिखी। अनुश्री को रोककर महिला ने उससे पूछा कि उसने चार साल की एक बच्ची को कहीं देखा है।
इस पर अनुश्री का माथा ठनका, वह अपना स्कूल बैग महिला को थमाकर पीछे की ओर दौड़ पड़ी। इस दौरान बच्ची का हाथ पकड़कर बाबा उसे कहीं ले जा रहा था। छात्रा ने बच्ची का हाथ पकड़ लिया। इस दौरान बाबा घबरा गया और बच्ची का हाथ छोड़कर चलते टैंपों में सवार हो गया। अनुश्री ने बताया कि प्लेट न लगे होने के कारण वह टैंपो का नंबर नहीं पढ़ सकी।
मां को देखते ही बच्ची उससे लिपट गई। इसी दौरान वहां पहुंचे लोगों ने छात्रा के इस साहस की सराहना की। लोगों ने ताली बजाकर अनुश्री का उत्साह बढ़ाया। अनु के पिता गौरव ने बताया कि उनकी बेटी बहुत साहसी है। वह आईएएस बनकर देश सेवा करना चाहती है। मां श्वेता विश्नोई उसका हौसला बढ़ाती है। मंगलवार को स्कूल में छात्रा का अभिनंदन किया जाएगा।