पंतनगर। कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों के लिए बनने वाली दवाइयों में प्रयोग किया जाने वाला औषधीय मशरूम गैनोडर्मा ल्यूसीडियम की खेती पर्वतीय किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशालय स्थित समेटी व केवीके पिथौरागढ़ की ओर से क्षेत्रीय किसानों को गैनोडर्मा की सामूहिक खेती सफलतापूर्वक कराई जा रही है। वैज्ञानिकों की निगरानी में खेती के बाद पैदा होने वाले मशरूम को निजी कंपनियों तक पहुंचाने के लिए चेन भी तैयार करने की कवायद चल रही है।
किसान मेले में केवीके पिथौरागढ़ के स्टाल पर मौजूद विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. अलंकार सिंह ने बताया कि गैनोडर्मा ल्यूसीडियम औषधीय मशरूम है। यह जंगलों में प्राकृतिक रूप से लकड़ियों पर उगती है। इसका प्रयोग कैंसर, हार्ट व किडनी सहित तमाम बीमारियों की दवा बनाने में किया जाता है। यह मशरूम आठ से दस हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकता है।
प्रदेश में मशरूम की व्यावसायिक खेती निदेशालय की सह निदेशक डॉ. निर्मला भट्ट के निर्देशन में पिथौरागढ़ के क्षेत्रीय किसानों को करवाई जा रही है। पॉप्लर की लकड़ी के छह इंच लंबे और तीन इंच व्यास के टुकड़ों को उपचारित करने के बाद लैब में लाकर उसमें स्पॉन (बीज) डालते हैं और एक हफ्ते में माइसिलिया (सफेद रंग की फंगस) विकसित होने के बाद मिट्टी और चूने के मिश्रण (एक किलो मिट्टी में दो ग्राम चूना) में डाल देते हैं।
इसके बाद उचित तापमान वाली जगह पर रखकर मशरूम पैदा किया जाता है। बताया कि बरसात का सीजन मशरूम के लिए सबसे उपयुक्त होता है। एक ठूंठ से छह से 10 ग्राम तक मशरूम मिलता है। इसकी तीन महीने में चार फसल हो जाती हैं और इसे पॉलीहाउस में भी उगाया जा सकता है।
कैंसर से बचाता है गैनोडर्मा मशरूम
पंतनगर। डॉ. अलंकार ने बताया कि इस औषधि के बारे में लोगों की जानकारी बहुत कम है। इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और यह प्राकृतिक एंटीबायोटिक है। यह कैंसर से बचाने के साथ ही शुगर और मस्तिष्क संबंधी बीमारियों में कारगर होता है। साथ ही हृदय रोगियों के लिए भी फायदेमंद है। संवाद
मशरूम से गिरने वाला पाउडर भी होता इस्तेमाल
पंतनगर। डॉ. अलंकार ने बताया कि मशरूम जब भूरा रंग लेने लगता है तो उससे पाउडर झड़ता है। इसलिए मशरूम के नीचे कागज रखकर पाउडर एकत्र किया जाता है। यह पाउडर भी बेहद कीमती होता है, जो विभिन्न रोगों के कैप्सूल बनाने में प्रयोग किया जाता है। बताया कि अभी इसकी खेती में अधिकतर युवा ही दिलचस्पी ले रहे हैं। संवाद
स्टॉल पर गैनोडर्मा मशरूम की जानकारी देते डॉ. अलंकार सिंह।- फोटो : RUDRAPUR