उत्तराखंड के आठ गांव इन दिनों शरीर पर फोडा आते ही खौफ़जदा हो जाते हैं। इन गांवो में फोडे लोगों की मौत का कारण बन रहे हैं। लोगों को ड़र है कि जल्द इसका पता न चला तो उनका आखिर क्या होगा।
उत्तरकाशी के पुरोला ब्लाक के आठ गांव फोड़े की बीमारी की दहशत में हैं। सबरियार गांव में एक हफ्ते के अंदर पति-पत्नी की फोड़े से मौत हो गई। उनकी इकलौती बच्ची मंगा (8) को भी फोड़ा है।
दून अस्पताल पंहुचे लोग
घबराए परिजन गांवों में बीमारी फैलने के डर से रोगी को दून अस्पताल लेकर आए हैं। बीमारी की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं।
सबरियार के रहने वाले सोवेंद्र सिंह ने बताया कि उनके भाई जयदेव सिंह की पत्नी के कंधे के नीचे फोड़ा निकला था। पांच अगस्त को फोड़े में तेज दर्द उठा और फिर मौत हो गई।
बच्ची को हो रही तकलीफ
इसके बाद 8 अगस्त को जय देव और उसकी इकलौती बेटी मंगा के भी फोड़ा निकला। बच्ची को ज्यादा तकलीफ थी। उसे लेकर पुरोला आए। बच्ची को 9 अगस्त को दून अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
सोवेंद्र ने बताया कि बच्ची को लेकर वह और जयदेव के साले उपेंद्र सिंह एंबुलेंस में बैठ गए। जयदेव पीछे थे, तभी उनके कंधे के फोड़े में जोर का दर्द उठा और मौत हो गई। बच्ची को लाकर दून अस्पताल के बालरोग वार्ड में भर्ती किया गया है।
फोड़े की हो रही जांच
मंगा का इलाज कर रहीं बालरोग विशेषज्ञ डा ज्योति पाठक ने बताया कि बच्ची के टांसिल पके हैं। मवाद को जांच के लिए भेजा गया है। कार्यवाहक महानिदेशक डा जेएस जोशी ने बताया कि इस संबंध में सीएमओ उत्तरकाशी ने उन्हें सूचना दी थी।
रोग के संबंध में जांच कराई जा रही है। सोवेंद्र ने बताया कि सबरियार समेत आसपास के आठ गांवों में इस फोड़े की बीमारी से दहशत फैली है। इन गांवों के संपर्क मार्ग खत्म हो गए हैं। लोगों को आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है।