आप भी सोच रहे होंगे कि भला गाय कैसे किसी की जान आपदा में बचा सकती है जबकि सरकारी मशीनरी तक फेल हो गई हो। यकीन मानिए आज एक महात्मा जिंदा है तो उन सात गायों की बदौलत जिसे साधू वर्षों से पाल रहा था।
गायों से था बेहद प्रेम
केदारनाथ में आई भयंकर आपदा में एक महात्मा की जान सात गायों ने बचाई है। आपदा के दौरान साधू बुरी तरह से घायल हो गया था। साधू इन गायों को बेहद प्रेम करता था लेकिन फिलवक्त अपनी देहरादून के दून अस्पताल में अपना इलाज करवा रहा है।
केदारघाटी स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर के पुजारी रामदेव गिरि (68) ने सीने पर पत्थर रखकर अपनी गौशाला की सात गायें बेचीं तब जाकर दून अस्पताल तक पहुंच पाए। साधू कहतें हैं कि उनकी जान गौ माता ने बचा ली।
आपदा में हो गया था घायल
आपदा में वह घायल हो गए थे, उनके सिर पर चोट आई है जिससे शरीर के बाईं तरफ का हिस्सा सुन्न पड़ गया है। प्राइवेट वाहन चालक ने उनसे 17 हजार रुपये किराया लिया।
पुजारी रामदेव गिरि का दून अस्पताल में एक महीने से इलाज चल रहा है। पहले उन्हें वार्ड नंबर 16 के बेड नंबर 17 पर भर्ती किया गया था।
अब उन्हें इमरजेंसी के वार्ड नंबर एक में शिफ्ट कर दिया गया है। घटना की याद करके वे रो पड़ते हैं। हाथ जोड़कर कहते हैं कि ‘हे केदारबाबा माफ कर दो।’
50 साल में नहीं देखी ऐसी आपदा
गिरि बताते हैं कि वह केदारघाटी में 50 साल से रह रहे थे। कंडारे के पास क्रोंच पर्वत के नीचे उनकी कुटिया थी। यह सौ साल पुरानी है। पहले इसमें पुजारी शारदा गिरि और केशव गिरि रहा करते थे।
कहते हैं कि मदद के लिए शासन-प्रशासन कोई नहीं पहुंचा। लोग अपनी कोशिशों से बचे हैं। गिरि कहते हैं कि पचास सालों में पहली बार उन्होंने ऐसी आपदा देखी है।