मनेरी भाली प्रथम और द्वितीय चरण परियोजना में 27 दिनों से विद्युत उत्पादन ठप है। जिससे निगम को 15 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है।
मनेरी भाली प्रथम चरण के तिलोथ विद्युत गृह में पिछले वर्ष की बाढ़ से मिले सबक के बावजूद टीआरसी गेट चोक होने से नहीं रोके जा सके।
साथ ही स्टेज टू शुरू हुए पांच वर्ष बीतने के बाद भी न तो जोशियाड़ा बैराज जलाशय में सुरक्षा इंतजाम हुए और न ही डूब क्षेत्र प्रभावितों का पुनर्वास हो सका।
90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना की 30-30 मेगावाट की तीन टरबाइनों से रोजाना 2.16 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होती है। भागीरथी में पर्याप्त पानी के बावजूद तिलोथ विद्युतगृह में उत्पादन बंद है। कारण पावर हाउस की टेल रेस चैनल के गेट इस बार फिर 16-17 जून की बाढ़ में मलबे से जाम होना है।
इधर 304 मेगावाट की स्टेज टू में 76-76 मेगावाट की चार टरबाइनों से पर्याप्त पानी वाले इस सीजन में रोजाना छह मिलियन यूनिट उत्पादन होता है। परियोजना शुरू होने के पांच वर्ष बाद भी डूब क्षेत्र के प्रभावितों का पुनर्वास और मुआवजे का मामला अधर में है।
जलाशय के किनारे सुरक्षा दीवारें न बनने से ज्ञानसू बस्ती पर खतरा मंडरा रहा है। जिससे वे जलाशय में पानी ही नहीं भरने दे रहे हैं। परिणाम सामने है, 27 दिनों से दोनों बिजली परियोजनाएं ठप हैं।
वार्षिक लक्ष्य हासिल होना मुश्किल
उत्तरकाशी। डीपीआर के मुताबिक 1530 मिलियन यूनिट क्षमता वाली स्टेज टू परियोजना में वर्ष 2013-14 का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य 1250 मिलियन यूनिट है। 506 मियू क्षमता वाले प्रथम चरण परियोजना का वार्षिक लक्ष्य 475 मियू है। पर्याप्त पानी वाले सीजन में उत्पादन न होने से इस बार दोनों परियोजनाओं से वार्षिक लक्ष्य हासिल होना मुश्किल लग रहा है।
रोजाना 57.12 लाख की हानि
उत्तरकाशी। जल विद्युत निगम इन परियोजना से तैयार बिजली पर 70 पैसे प्रति यूनिट शुद्ध मुनाफा कमाता है। ऐसे में इन दिनों निगम को 8.16 मिलियन यूनिट उत्पादन हानि उठानी पड़ रही है। रुपयों में यह नुकसान 57.12 लाख रुपये रोजाना है। जो दिनों के हिसाब से करोड़ों में पहुंच रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
'तिलोथ पावर हाउस में टीआरसी के जाम गेट खुलवाने की कोशिश की जा रही है। सड़कें बदहाल होने से संसाधन उपलब्ध न होने से दिक्कत आ रही है। जोशियाड़ा डूब क्षेत्र में पुनर्वास व मुआवजे के साथ ही शीघ्र सुरक्षा कार्य कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही दोनों परियोजनाओं में उत्पादन बहाल किया जाएगा।'
एससी बलूनी, डीजीएम सिविल जल विद्युत निगम।