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जौनपुर के यूथ एग्रो फार्म पापरा को नहीं मिल रहे खरीदार

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कोरोना का असर गत वर्ष के लॉकडाउन के भांति इस साल भी जौनपुर ब्लॉक के यूथ एग्रो फार्म पापरा थत्यूड़ के किसानों पर पड़ा है। अच्छी मात्रा में उत्पादित फूलों को बाजार नहीं मिलने से कई क्विंटल फूल बर्बाद होने की कगार पर है। आजीविका संवर्द्धन के लिए काश्तकारों की मेहनत पर पानी फिरने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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वर्ष 2019-20 में कोरोना लॉकडाउन के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने गांवों को लौटे थे, जिसके बाद उन्होंने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाए। प्रधान रविंद्र चमोली की मदद से इस भूमि पर ग्रामीणों ने आर्गेनिक खेती करना शुरू किया। गांव के युवाओं ने भूमि पर चक बनाकर घेरबाड़ की। वहां ऑर्गेनिक सब्जी, सगंध पुष्प और अन्य फूलों की खेती शुरू की। इसके लिए उन्होंने मिलकर ग्रामीण यूथ एग्रो फार्म का गठन किया। खेती के साथ-साथ उन्होंने मुर्गी फार्म और अंडों का व्यवसाय भी शुरू किया। सरकार की ओर से संचालित जलागम ग्राम्या-2 के अंतर्गत उन्हें स्वरोजगार के लिए निशुल्क बीज भी उपलब्ध कराया गया। गत वर्ष तो सब्जी और फूलों का कुछ मात्रा में बिक्री हुई, लेकिन इस साल शादियों के सीजन में ही कोरोना कर्फ्यू लगने से फूलों का कोई खरीदार नहीं मिल पा रहा है। प्रधान रविंद्र चमोली, शांति प्रसाद, प्रेमलाल चमोली, हरीश प्रसाद, बामु देवी, संगीता ने बताया कि शादी व अन्य सामुदायिक समारोह में साज-सज्जा के लिए प्रयोग किए जाने वाले लिलियम फूल के चार हजार और ग्लैडियोलस के छह हजार बल्ब (बीज) खेतों में बोए थे। उनकी फसल भी प्रचुर मात्रा में तैयार हो गई, लेकिन कोरोना कर्फ्यू से फूल खेतों में ही सड़ने लगे हैं।
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