घनसाली (टिहरी)। आपदा राहत शिविर में रह रही तिनगढ़ की महिलाओं को अब अपनी खेतीबाड़ी और पशुओं की चिंता सताने लगी है। उन्होंने कहा कि वे कब तक ऐसे शिविर में रहेंगे। प्रभावितों ने प्रशासन से विस्थापन के लिए जमीन मिलने तक गांव के नजदीक रहने की व्यवस्था की मांग की है।
भिलंगना ब्लाॅक के तिनगढ़ गांव में 27 जुलाई को आई आपदा में गांव के कई आवासीय मकान मलबे से दब गए थे। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पूरा गांव खाली करा दिया था। प्रभावित करीब 95 परिवारों को राजकीय इंटर काॅलेज विनयखाल में बनाए गए आपदा राहत शिविर में भेजा गया था। उनमें से अब तक कई परिवार किराये के भवनों में हैं, जबकि 40 परिवार राहत शिविर में रह रहे हैं।
शिविर में रह रही आपदा प्रभावित मंजू देवी, सविता देवी, कौशला देवी, विनिता, अंबिका देवी, जमुना देवी और मंगशिरी देवी ने कहा कि राहत शिविर में रहते हुए उन्हें 16 दिन बीत गए हैं। अभी तक विस्थापन के लिए जमीन नहीं मिल पाई है। राहत शिविर से गांव जाकर खेती-बाड़ी का काम करना भी मुश्किल है। काफी दिनों से खेतों में खड़ी फसल की निराई-गुड़ाई नहीं होने के कारण अब धान, मंडुवा, झंगोरा, आलू आदि फसल खरपतवार के कारण खराब होने वाली है। उन्होंने मकान बनाने के लिए जमीन मिलने तक उन्हें गांव के नजदीक किराये के कमरे दिलाने की मांग की।
तिनगढ़ के विस्थापन के लिए अभी नहीं मिली जमीन
आपदा प्रभावित तिनगढ़ गांव के विस्थापन के लिए प्रशासन अभी तक जमीन नहीं तलाश पाया है। प्रशासन ने पहले भिगुन के झल्ड और ठांगधार के उत्तरा नामे तोक में जमीन दिखाई थी। तब ग्रामीण झल्ड में स्थित जमीन लेने को तैयार हो गए थे, लेकिन भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू करने से पहले ही भिगुन के दो-तीन परिवारों ने अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया। इससे प्रशासन की परेशानी बढ़ गई है।
राहत शिविर में रह रहे प्रभावितों को चमियाला और घनसाली का विकल्प भी दिया गया था, लेकिन वहां जाने के लिए प्रभावितों ने इनकार कर दिया है। अब उनके लिए तिनगढ़ के आसपास गांव में किराये के मकान के लिए बातचीत की जा रही है। प्रभावितों के विस्थापन के लिए जमीन की तलाश की जा रही है।
- अपूर्वा सिंह, एसडीएम, घनसाली।