नवरात्र पर्व पर सात दिन पहले सिद्धपीठ सुरकंडा मंदिर से मायके जड़धार गांव आई सुरकंडा देवी की डोली बृहस्पतिवार को ससुराल लौट गई। देवी को विदाई देते समय लोगों की आंखें नम हो गई। इन भावुक क्षणों में मां सुरकंडा की डोली से लिपटकर हर किसी की जुबां पर फिर जल्दी आने की ख्वाहिश दिख रही थी।
बृहस्पतिवार सुबह सिद्धपीठ सुरकंडा देवी की प्रतिमूर्ति की वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद गांव स्थित मंदिर में बोए गए जौ (हरियाली) को काटकर श्रद्धालुओं में बांटा गया।
सुबह दस बजे तक देवी के दर्शन करने के लिए नागणी सहित कई गांवों के सैकड़ों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। दोपहर एक बजे विदाई से पहले देवी का मंडाण लगते ही जागरों और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। मंडाण के दौरान कई लोग झूमने लगे।
फिर जैसे ही देवी की ससुराल विदाई का समय आया तो हर किसी की आंखें भर आईं। लोगों ने धन-धान्य, पूरी हलवा, मिष्ठान के साथ देवी को विदा किया। इस मौके पर प्रधान रेखा जड़धारी, शिव सिंह जड़धारी, मनवीर जड़धारी, वीर सिंह जड़धारी, सुखपाल सिंह, पुष्पा देवी, गीता देवी आदि उपस्थित थे।