प्रतापनगर स्थित रानी महल को संग्रहालय बनाने की कवायद शुरू। फाइल फोटो।
- फोटो : NEW TEHRI
लंबे समय से देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुके राजशाही दौर में बने ऐतिहासिक रानी महल के दिन बहुरने की उम्मीद जग गई है। प्रदेश सरकार ने लोनिवि को परंपरागत शैली में निर्मित करीब 30 कक्षों वाले इस रानी महल के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए 50 लाख की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।
टिहरी के तत्कालीन राजा सुदर्शन शाह के पुत्र कीर्ति शाह ने प्रतापनगर में अपनी राजधानी स्थापित कर 1875 से 77 के बीच इस रानी महल का निर्माण करवाया। वर्ष 1949 में राजशाही का विलय स्वतंत्र भारत में होने के कारण यह महल देखरेख के अभाव में जीर्णशीर्ण बना हुआ है। कई वर्षों से इस महल में प्रतापनगर के ब्लॉक कार्यालय भी संचालित हुए थे, लेकिन वर्तमान में रानी महल खाली पड़ा हुआ है।
फरवरी 2021 में टिहरी झील महोत्सव में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने महल का जीर्णोद्धार पौराणिक वस्तु शैली में ही करने की घोषणा की थी। रानी महल जिस शैली में बना हुआ है, वर्तमान में लोनिवि उसी तरह इसका रंग रोगन, खराब हो चुकी लकड़ियों को बदलने, चित्रकारी समेत अन्य कार्यों के लिए डीपीआर बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए कंसलटेंस भी नियुक्त किया जा रहा है।
प्रतापनगर के रानी महल का जीर्णोद्धार की डीपीआर तैयार करने को कंसलटेंस नियुक्त करने को निविदा मांगी गई है। जिस परंपरागत शैली में महल बना है, उसी तरह जीर्णोद्धार/सौंदर्यीकरण किया जाना है।
-पीएस बुटोला, सहायक अभियंता, लोनिवि बौराड़ी।