रेडोन गैस पर बारीकि से नजर रखे जाने पर भूकंप का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। इसके लिए क्षेत्र की हीलियम, कार्बन डाई आक्साइड, पृथ्वी की संरचना के बदलावों का अध्ययन किया जाना भी जरूरी है।
रेडियो एक्टिविटी लोगों के लिए समस्या पैदा कर सकती है, लेकिन इससे कई गंभीर बीमारियों का भी इलाज किया जा सकता है। यह बात स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल में चल रही राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने कही।
एचएनबी गढ़वाल विवि के एसआरटी परिसर बादशाहीथौल और पीजी कालेज नई टिहरी की पहल पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन पर बीएआरसी मुंबई की वैज्ञानिक बीके सपरा ने भूमि से निकलने वाली थोरोने गैस की जानकारी दी।
ताईवान के डॉ. विवेक वालिका ने रेडोन के क्षेत्र में हो रहे शोधों पर जानकारी दी। जापान के केंजी सूगीमोरी ने कहा कि रेडियो एक्टिविटी का हॉट स्पा के माध्यम से त्वचा, जोड़ों का दर्द जैसी गंभीर बीमारियों का सफल इलाज बताया।
शोधार्थी तुषार कंडारी ने बताया कि एमबीटी के राजपुर क्षेत्र में रेडोन गैस सामान्य से अधिक है।
समापन पर हुई पोस्टर प्रतियोगिता में सुदीप कुमार, प्रीति पंत, काली प्रसाद, मनीष कुमार अव्वल रहे। क्विज में काली प्रसाद जीते। इस मौके पर परिसर निदेशक प्रो. आरसी रमोला, जापान के प्रो. शरद कुमार साहू, डा. वीणा जोशी, डा. कुलदीप रावत, प्रो. वीएस सिंह, डा. जेडीएस नेगी, डा. एए बौड़ाई, डा. रवींद्र सिंह, डा. एनपी नैथानी, डा. इंदू तिवारी, डा. कविता काला, डा. जीपी गुर्साइं, महेंद्र सिंह, अनूप आदि उपस्थित थे।