कभी टिहरी रियासत की राजधानी और बाद में टिहरी का जिला मुख्यालय रहा नरेंद्रनगर सरकारी दफ्तरों के कारण चहल-पहल से भरा रहता था। टिहरी शहर के एवज में बसाए गए नई टिहरी शहर को जिला मुख्यालय बनाने के बाद नरेंद्रनगर के दुर्दिन शुरू हुए। पहले कलेक्ट्रेट, फिर दूसरे कार्यालयों की शिफ़्टिंग के साथ ही वक्त के साथ नरेंद्रनगर में चहल-कदमी धीमी पड़ती जा रही है।
राज्य शासन और टिहरी प्रशासन ऐतिहासिक नरेंद्रनगर को सरकारी दफ्तरों से विहीन करने पर तुला है। अभिभाजित उत्तरप्रदेश में जिस नगर में 60 विभागों के दफ्तर होते हैं, वहां अब महज 16 महकमे ही शेष रह गए हैं। इन्हें भी शिफ्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका सीधा असर नरेंद्रन्रर के लोगों की आजीविका पर पड़ रहा है।
वर्ष 1988 में नरेंद्रनगर से जिला मुख्यालय हटाकर नई टिहरी बनाया गया। उसके बाद से यहां से सरकारी विभागों के शिफ्टिंग का सिलसिला नहीं नहीं रहा है। उत्तराखंड बनने के बाद साल दर साल यहां से विभागों की शिफ्टिंग का सिलसिला जारी है। हाल में क्षेत्र से दो और विभागों के कार्यालय हटा दिए गए हैं। सरकारी दफ्तरों को हटाने के विरोध में यहां आंदोलन भी होते रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन ने इस मसले पर कभी जनभावनाओं की थाह लेना मुनासिब नहीं समझा।
कब- कब शिफ्ट हुए सरकारी ऑफिस
2002-डीआरडीए
2003 जलागम प्रबंधन
2005 पुलिस लाइन
2007-08 पर्यटन अधिकारी
2014-एससीइआरटी
2016-मई-जिला समाज कल्याण अधिकारी और जिहला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय।
यह कार्यालय बचे हैं शेष
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला कमांडेंट होमगार्ड, जिला पंचायतराज अधिकारी, सहायक निबंधक जिला सहकारी समितियां, ईई सिंचाई खंड-दो, ईई पीडब्लूडी, जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी, उपमुख्य चिकित्साधिकारी, कोषाधिकारी, जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी, ईई पीएमजीएसवाई, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, जिला क्रीड़ा अधिकारी, एई लघु सिंचाई और परियोजना अधिकारी उरेडा।