अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने उत्तराखंड पेयजल निगम का राजकीयकरण करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जल संस्थान और जल निगम का एकीकरण कर पेयजल विभाग बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन वर्षों बाद भी मांग पूरी नहीं हो रही है। इसका खामियाजा कर्मचारियों से लेकर जनता को उठाना पड़ रहा है। कहा कि जल्द मांग पूरी न होने पर आंदोलन किया जाएगा।
बुधवार को अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने एडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। कहा कि जल संस्थान और जल निगम का राजकीयकरण हो जाएगा तो जनता को एक ही विभाग के पास समस्या के निराकरण के लिए जाना पड़ेगा। साथ ही विभागीय कर्मियों को भी काम करने में आसानी हो। इसके साथ ही उन्होंने पेयजल निगम के कर्मियों, पेंशनरों के रुके हुए मई, जून, जुलाई 2021 के वेतन भुगतान करने की भी मांग की। ज्ञापन पर समन्वय समिति के संरक्षक आलोक कुमार, जिला संयोजक रविंद्र बिष्ट, राजेश सिंह, एलएन चंदोला और एसएन सिंह के हस्ताक्षर हैं।
वहीं श्रीनगर में भी अधिकारी/कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति उत्तराखंड पेयजल निगम संगठन ने निगम के राजकीयकरण करने सहित विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन भेजने वालों में संगठन के संरक्षक आरसी मिश्रा, संयोजक जगदीश प्रसाद नौटियाल, एके गुरंग, सुधीर कुमार, जगदीश प्रसाद नौटियाल, रविंद्र सिंह, कुंवर सिंह रावत, गोवर्द्धन सिंह रौथाण, त्रिलोक पंवार, दर्शन सिंह बिष्ट, गौरव नौटियाल, दीपक नेगी और राजन कुमार टम्टा आदि शामिल थे।
21 से करेंगे गेट मीटिंग
गोपेश्वर। यहां भी अधिकारी कर्मचारी समन्वय समिति ने मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। कहा गया कि मांग पूरी नहीं होने पर 21 अगस्त को सभी जिलों और इकाइयों में गेट मीटिंग, 18 सितंबर को देहरादून में धरना प्रदर्शन, 25 अक्तूबर को सभी जिला और इकाइयों में धरना प्रदर्शन और 28 अक्तूबर से अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। ज्ञापन भेजने में पेयजल निगम गोपेश्वर इकाई संयोजक डीएस नेगी, बीरेंद्र सिंह रावत, सह संयोजक प्रशांत सिंह, विक्रम सिंह, ताल सिंह, राम प्रसाद पुरोहित, जीत सिंह, पवन पुंडीर, बीरेंद्र लाल, चंद्र सिंह, मोनिका रावत, चंद्रकला आदि उपस्थित थे।