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चांठी-डोबरा पुल का मुद्दा बना वोट बटोरने जरिए

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नई टिहरी। बांध प्रभावित प्रतापनगर क्षेत्र को जोड़ने के लिए 14 साल से बनाया जा रहा चांठी-डोबरा पुल चुनाव में नेताओं को वोट बटोरने का काम कर रहा है। भाजपा, कांग्रेस ने चार लोकसभा चुनाव और तीन विधानसभा चुनाव में पुल का मुद्दा प्रमुखता से उठाकर वोट हासिल किए, लेकिन जीतने के बाद पुल निर्माण के लिए गंभीरता से प्रयास नही किए।
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टिहरी बांध की झील बनने के कारण आवागमन में परेशानियां झेल रहे प्रतापनगर क्षेत्रवासियों की सुविधा के लिए 2006 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पुल निर्माण शुरू करवाया था। 2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पुल निर्माण को मुद्दा बनाकर जीत दर्ज की। वहीं 2007 के ही लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने पुल निर्माण को भरोसा देकर जीत हासिल की। 2009 के लोकसभा चुनाव में भी पुल प्रमुख मुद्दा रहा। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पुल न बनने के लिए तत्कालीन भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहरा कर जीत हासिल की। इसके बाद 2012 के लोकसभा उपचुनाव और 2014 के आम चुनाव में भाजपा ने पुल निर्माण का वायदा कर जीत हासिल की। बावजूद पुल नही बन पाया। फिर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को पुल में विफल साबित होने का आरोप लगाया। उन्होंने जनता से तत्काल पुल बनने का भरोसा देकर जीत हासिल की, लेकिन दो साल बाद भी पुल की स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोकसभा चुनाव में भी चांठी-डोबरा पुल का मुद्दा प्रत्याशियों से लेकर सोशल मीडिया पर खूब बहस हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी पुल निर्माण का मुद्दा नेताओं को वोट बटोरने का काम करेगा। चूंकि इन 14 सालों में निर्माण पर करीब ढाई सौ करोड़ खर्च हो चुके हैं।
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पुल निर्माण कार्य जारी है। उम्मीद है कि दिसंबर 2019 तक पुल बनकर तैयार हो जाएगा। इस दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।
-केएस असवाल, ईई, लोनिवि चांठी-डोबरा पुल।

लंबे समय से पुल निर्माण को लेकर संघर्ष किया जा रहा है, लेकिन सरकारों की विफलता के चलते पुल निर्माण नही हो पाया। हमारा संघर्ष पुल बनने तक जारी रहेगा।
-राजेश्वर पैन्यूली, मुख्य संयोजक चांठी-डोबरा पुल बनाओ संघर्ष समिति।
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