नई टिहरी। मानव गुलदार संघर्ष न्यूनीकरण कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए खबरों को सनसनीखेज बनाने की बजाए जन जागरूकता के रूप में प्रकाशित करने का सुझाव दिया। कहा कि गुलदार भी इको सिस्टम का हिस्सा हैं। ऐेसे में इनसे मिलकर जीवन चक्र को आगे बढ़ाना चाहिए।
टिहरी वन प्रभाग की ओर से वन चेतना केंद्र में आयोजित मीडिया कार्यशाला का डीएम सोनिका ने दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र की तरह मानव-वन्य संघर्ष न्यूनीकरण में मीडिया की भूमिका अहम है। घटनाएं होने के बाद मीडिया उसे कैसे प्रस्तुत करता है, इस पर समाज की नजर रहती है। डीएफओ डा. कोको रोसे ने कहा कि मानव-गुलदार संघर्ष रोकने के लिए विभाग ने आरआरटी (रैपिड रिस्पांस टीम) का गठन किया है। पौखाल और अगरोड़ा क्षेत्र को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है, जहां पर स्कूली बच्चों, ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा। मुंबई से आए वरिष्ठ पत्रकार रंजीत जाधव ने महाराष्ट्र में किए गए अध्ययनों को साझा करते हुए कहा कि मीडिया को वन्यजीव और मानव संघर्ष की घटनाओं लिए स्पॉट पर जाकर पूरी जानकारी जुटानी चाहिए। तितली ट्रस्ट के संजय सोधी और राजेश भट्ट ने कहा कि गुलदार के नरभक्षी होने पर मारने, पकड़ने से घटनाएं कम नहीं हो सकती है, बल्कि संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि होती है। इस मौके पर एसडीओ वीके सिंह, रेंज अधिकारी आशीष डिमरी, चमन लाल, लक्की शाह, शरद सिंह नेगी, एचएस, अनिल राणा, बलवीर सिंह, बुद्धिराम रतूड़ी, विजयपाल राणा, मेल सिंह पंवार, श्याम लाल, गंभीर भंडारी, वसुदेव उनियाल आदि मौजूद थे।