इन दिनों टिहरी झील सोना उगल रही है। झील का जलस्तर बढ़ने से टीएचडीसी टिहरी और कोटेश्वर बांध से प्रतिदिन 30 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन कर करीब 10 करोड़ रुपये की आय अर्जित कर रही है। सामान्य दिनों की अपेक्षा वर्तमान में टीएचडीसी दोगुना विद्युत उत्पादन कर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रही है। बारिश के मौसम में देशभर के थर्मल अन्य हाइड्रो प्रोजेक्टों से विद्युत उत्पादन कम होने के कारण टीएचडीसी को ग्रिड से बिजली की अधिक डिमांड मिल रही है।
टिहरी बांध की विद्युत उत्पादन की कुल क्षमता 24 सौ मेगावाट की है। एक हजार मेगावाट टिहरी परियोजना और चार सौ मेगावाट कोटेश्वर बांध से विद्युत उत्पादन हो रहा है, जबकि तृतीय चरण की एक हजार मेगावाट की पीएसपी (पंप स्टोरेज प्लांट) निर्माणाधीन है। टीएचडीसी ने 2024 तक पीएसपी से विद्युत उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पीएसपी परियोजना का निर्माण कार्य जोरशोर से चल रहा है। बीते 25 अगस्त को टिहरी बांध की झील का जलस्तर आरएल 828 मीटर से बढ़ाकर अधिकतम आरएल (रिवर लेबल) 830 मीटर तक भरने की अनुमति सरकार से मिली है, जिसका टीएचडीसी को लाभ भी मिलने लगा है।
पर्वतीय क्षेत्र में हो रही बारिश से इन दिनों झील का जलस्तर आरएल 829.50 मीटर तक पहुंच गया है। भागीरथी नदी से 300 क्यूमेक्स, भिलंगना से 130 और अन्य सहायक नदियों से 170 क्यूमेक्स पानी झील में आ रहा है। झील से 350 से लेकर 400 क्यूमेक्स पानी सिंचाई और पेयजल के लिए नदी की ओर छोड़ा जा रहा है। ग्रिड से अधिक डिमांड आने के कारण टीएचडीसी टिहरी बांध से 25 और कोटेश्वर बांध से पांच मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन 24 घंटे में कर रहा है। सामान्य दिनों में 24 घंटे में 8 से 10 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन हो पाता है। इन दिनों टीएचडीसी औसतन एक दिन में 10 करोड़ से अधिक की बिजली ग्रिड को दे रहा है, जिससे जिससे टीएचडीसी अच्छी खासी आय अर्जित कर देश की ऊर्जा जरूरतों को भी पूरा कर रही है।
टिहरी बांध निरंतर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा रहा है। टिहरी और कोटेश्वर बांध से औसतन 30 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन 24 घंटे में रहा है। झील का जलस्तर आरएल 829.50 मीटर के करीब है।
-यूके सक्सेना, अधिशासी निदेशक, टीएचडीसी इंडिया लि.भागीरथीपुरम टिहरी।