उत्तराखंड शिक्षा विभाग में कुछ शिक्षक गंभीर रूप से बीमार हैं, लेकिन विभाग बेपरवाह बना है, पिछले शिक्षा सत्र में जिन बीमार, विधवा और विकलांग शिक्षकों के नियम 29 (1) के तहत तबादले होने थे, अब तक इनकी सूची अपडेट नहीं की गई है।
यही वजह है कि मंगलवार को शासन में हुई बैठक में तबादलों पर कार्रवाई नहीं हो पाई। शिक्षा सचिव डी सेंथिल पांडियन ने शिक्षा निदेशकों को सूची अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में नियम 29 (1) के तहत पिछले दो शिक्षा सत्र बीतने के बावजूद हजारों शिक्षक तबादलों का इंतजार ही करते रह गए।
विभाग ने पिछले शिक्षा सत्र में अनिवार्य और अनुरोध के आधार पर तबादले किए लेकिन विभाग ने इस नियम के तहत होने वाले शिक्षकों के आवेदन पत्रों की सुध नहीं ली। इस विभागीय लापरवाही के शिकार कुछ कैंसर पीड़ित शिक्षकों की मौत भी हो गई। दून में भी तबादलों की मांग कर रही एक शिक्षिका के पति की पिछले महीने अप्रैल में मौत हो गई।
इतना सबकुछ होने के बावजूद बेसिक शिक्षा निदेशालय नींद से नहीं जागा। मंगलवार को शासन में नियम 29 (1) के तहत पात्र शिक्षकों के मामले में फैसला होना था, लेकिन विभागीय अधिकारी यहां भी आधी-अधूरी तैयारी से पहुंचे। नियमावली के प्रावधान के अनुरूप सूची अपडेट नहीं थी, जिससे बैठक की कार्यवाही पूरी नहीं हो पाई।
विभागाध्यक्षों को नियमावली के प्रावधान के अनुरूप सूची अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं, बैठक अब दुबारा से बुधवार को रखी गई है।
- डी सेंथिल पांडियन, शिक्षा सचिव
विभाग 29 (1) के तहत तबादलों को उलझाए हुए हैं, राज्य चिकित्सा परिषद के प्रमाण पत्र की अनिवार्यता ठीक नहीं है। जो शिक्षक दिल्ली या फिर अन्य अस्पतालों में भर्ती हैं वे परिषद का प्रमाण पत्र कैसे लाएंगे।
- राम सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राजकीय शिक्षक संघ