शारदा एवं ज्योर्ति पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मंगलवार को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से केदारनाथ जाने की अनुमति मांगी है।
उन्होंने ऊखीमठ में शुरू की गई भगवान शंकर की पूजा का विरोध किया है। अखाड़ों के संतों एवं षड्दर्शन साधु समाज ने भी शंकराचार्य को समर्थन प्रदान किया।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने मंगलवार शाम कनखल स्थित मठ में अखाड़ों और आश्रमों के संतों की बैठक बुलाई। बैठक को जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य ने पूर्ण समर्थन प्रदान किया।
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बैठक में महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद, रवींद्र पुरी, रामानंद पुरी, ऋषिश्वरानंद, अविमुक्तेश्वरानंद, श्रीधरानंद, बाबा हठयोगी दिगंबर आदि संत शामिल थे।
बैठक के बाद जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने पत्रकारों को बताया कि केदारनाथ मंदिर की सफाई साधु-संत स्वयं करेंगे। वे अपने प्रतिनिधि के साथ संतों के एक प्रतिनिधि मंडल को सफाई कार्य पूरा कर पूजा अर्चना के लिए केदारनाथ भेजेंगे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तराखंड सरकार उनके प्रतिनिधि मंडल को केदारनाथ ले जाएगी और अनुमति प्रदान करेगी। यह पूछे जाने पर कि यदि अनुमति न दी तो उन्होंने कहा कि अनुमति अवश्य मिलेगी। इस आशय का ज्ञापन भी बैठक के बाद मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भेज दिया है।
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बैठक में रोष जताया गया कि संतों से पूछे बिना ही रावल ने ऊखीमठ में पूजा अर्चना शुरू करा दी है।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने पत्रकारों को बताया कि आज की बैठक में प्रदेश के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी को भी भाग लेना था। लेकिन खराब स्वास्थ्य के चलते राज्यपाल नहीं आ पाए। राज्यपाल अब दो दिन बाद कनखल आएंगे।