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दुनिया में आएंगे, मगर नहीं मिलेंगे 'पापा'

Thu, 18 Jul 2013 07:23 PM IST
कर्णप्रयाग/विनय बहुगुणा
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वो मासूम बच्चे जब अपनी पलक खोलेंगे, यह सुंदर दुनिया उनके सामने होगी। अगर कोई नहीं होगा तो उनके पिता। आपदा की मारी केदारघाटी में ये सिर्फ पांच उदाहरण नहीं हैं। ऐसे कई मासूम हैं जो जब अपनी पलक खोलेंगे तो उनके पिता नहीं होंगे। जिन्हें पिता की गोद में दुलार पाना और खिलौनों के लिए मचलना था। दुलराने और बेटे की जिद पूरी करने वाले पिता की कमी आपदा पीड़ित केदारघाटी के कई मासूम शिद्दत से अरसे तक महसूस करेंगे।
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केदारधाटी में बीस से अधिक ऐसे बच्चे हैं, जो अभी मां की कोख में हैं। इनका दुर्भाग्य यह है कि वे जन्म से पहले ही पिता को खो चुके हैं।  बच्चों के जन्म पर घर की स्थिति भी अलग होगी। बच्चे के जन्म का उल्लास पिता की गैरमौजूदगी से मातम में बदल चुका है।

केस वन
गुप्तकाशी क्षेत्र के तलुंजा गांव के ढांगा तोक में कविता देवी (21) के 24 वर्षीय पती विजय लाल को केदारनाथ आपदा ने लील लिया। इस महिला की 1 साल की बेटी खुशी है। जबकि वह पुन: आठ माह से गर्भवती है। लेकिन उन्हें अभी तक कोई टीका भी नहीं लगा है।
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घर में ननद है, जिसके पैर पर गंभीर चोट है, वह चल भी नहीं पा रही है। ऐसे हालात में महिला को नन्हीं बच्ची सहित ननद की देखरेख भी करनी पड़ रही है।

केस दो
बडासू गांव में नीता देवी (23) का पति सियाराम भी केदारघाटी में हुई जलप्रलय में काल का ग्रास बन गया। घर में डेढ़ साल की छोटी बेटी नीमा है। जबकि उसकी पत्नी नीता का कुछ दिनों में प्रसव होने को है। लेकिन आपदा के कहर से उसे उचित स्वास्थ्य सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।

केस तीन
जनपद चमोली में गैरसैंण के सारकोट गांव की भागुली देवी के पति को केदारनाथ में हुई जलप्रलय ने लील लिया। एक छोटी बेटी है। जबकि वह पिछले तीन माह से गर्भवती है। घर की माली हालत भी ठीक नहीं है। इन स्थिति में कौन उसकी देखरेख करेगा।

केस चार
मैखंडा गांव की अंजना देवी (20) सात माह की गर्भवती है। यह उनकी पहली संतान है। लेकिन पति अरविंद लाल केदारनाथ की जलप्रलय का शिकार हो गए। घर में नए मेहमान की खुशियां आने से पहले ही घर में मातम छाया हुआ है।

केस पांच
ल्वाणी गांव में मंजू देवी की दो बेटिया 9 वर्षीय सृष्टि और 7 वर्षीय खुशबू है। वे छ: माह से गर्भवती है। लेकिन पति प्रेमचंद्र बीते 17 जून को केदारनाथ में हुई तबाही में काल का ग्रास बन गए। इस महिला की आजिविका का भी कोई साधन नहीं है।
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