हरिद्वार जिले के लिब्बरहेड़ी में जाहरवीर गोगा की छड़ी की पूजा मदरसे के मैदान में होती है। यहां छड़ी को मस्जिद के पास स्थापित किया जाता है। दोनों समुदाय के लोग इस अवसर पर भरने वाले मेले में शामिल होते हैं।
लिब्बरहेड़ी में सप्तमी के दिन जाहरवीर गोगा की छड़ी का पूजन होता है। इसमें श्रद्धालु चने की दाल, प्याज और इलायची दाने का प्रसाद चढ़ाते हैं।
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हिंदुओं की पूजा
छड़ी की विधि विधान से पूजा करते हैं। खास बात यह है कि छड़ी गांव के अरबी मदरसे के मैदान में स्थापित की जाती है। जिस स्थान पर यह छड़ी स्थापित की जाती है, उसके पास मस्जिद है।
यहां मेला भी लगता है। जिसमें हिंदू और मुस्लिम एक साथ भाग लेते हैं। देश की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे का यह मेला प्रतीक है।
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दोनों समुदायों में प्रेमभाव
पूर्व प्रधान रमेश चंद का कहना है कि गांव में भरने वाला छड़ी का मेला लंबे समय से लगता आ रहा है। इस मेले से दोनों समुदाय में आपसी प्रेमभाव बढ़ता है।
ग्रामीण फुरकान कहते हैं कि वह बचपन से इस मेले में आते रहे हैं। कभी महसूस ही नहीं हुआ कि एक समुदाय का मेला है। सभी लोग प्रेम से मेले का आनंद उठाते हैं।
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मेले में करते हैं शिरकत
मनोज शर्मा बताते हैं कि उनके गांव में दोनों समुदाय के लोग मिलजुलकर रहते हैं। दोनों समुदाय के लोग छड़ी मेला मिलकर लगवाते आ रहे हैं।