जनजातीय निदेशालय के दावों के विपरीत अभी भी राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय त्यूनी में अव्यवस्थाएं हावी हैं।
तीन माह से छात्रों को मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं मिला है। दोपहर और रात को महज दाल भात परोसा जा रहा है, जबकि सुबह नाश्ते के दौरान छात्रों को महज चाय और रस्क थमा दिया जाता है। मानकों के अनुसार छात्रों को मक्खन, अंडे, फल और दूध मिलना चाहिए। सोमवार को अमर उजाला संवाददाता ने जब विद्यालय पहुंचे, तो छात्रों का दर्द जुबां पर आया।
कक्षा दस के गोविंद और जयपाल ने बताया कि छात्रों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता बेहद ही निम्न स्तर की होती है। मानकों में मक्खन, अंडे, फल और दूध देने का प्रावधान है, लेकिन उनको महज दालभात परोसा जा रहा है, वह भी अधपका। कई बार आधी रात में छात्रों को पेट दर्द की शिकायत तक हो जाती है।
बता दें कि इससे पहले अमर उजाला ने नौ मार्च को राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय लाखामंडल की बदहाली का मामला भी उठाया था। जिसके बाद हरकत में आए विभाग ने सभी विद्यालयों की हालत में सुधार लाने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब भी हालत जस के तस हैं। स्कूल में कुल 174 छात्र अध्ययनरत हैं।
बदहाल भवन
दस साल से स्कूल भवन का रंग-रोगन नहीं हुआ है। कमरों के पंखे टूटे हुए हैं। ऐसे में गर्मियों के दौरान छात्रों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सुरक्षा के लिए लगाई गई जालियां भी टूटी हुई हैं। लाइट की फिटिंग भी कई जगहों पर उखड़ी हुई है। जिससे करंट की आशंका बनी रहती है। बाथरूम में लगाया हुआ सोलर हीटर भी सात साल से खराब पड़ा है।
मेन्यू के अनुसार भोजन क्यों नहीं मिल रहा है। इस संबंध में ठेकेदार को नोटिस भेजा जाएगा। भवन की बदहाली के संबंध में प्रधानाचार्य से रिपोर्ट मांगी गई है।
- योगेंद्र रावत, निदेशक जनजातीय निदेशालय